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वर्तमान की करते थे बात तभी नाम रखा ‘हाली’

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पानीपत। हाली पानीपती ट्रस्ट की ओर से विश्वविख्यात शायर एवं समाज सुधारक मौलाना ख्वाजा अल्ताफ हुसैन हाली की 108वीं पुण्यतिथि पर हाली अपना स्कूल में एक कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर हाली की विभिन्न गजलों का पाठ किया गया। बताया गया कि वे वर्तमान की बात करते थे इसीलिए उन्होंने अपना तख्खलुस ‘हाली’ अर्थात वर्तमान रखा।
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इस अवसर पर हाली अपना स्कूल की मुख्य अध्यापिका पूजा सैनी ने कहा कि हाली पानीपती एक ऐसे व्यक्ति थे, जिन्होंने न केवल तत्कालीन अपितु वर्तमान संदर्भों की समस्याओं के बारे में अपनी कविताओं एवं गजलों के माध्यम से संदेश दिया। उर्दू शायरी में उन्होंने शृंगार, प्रेम और प्रेमकथाओं को न कहकर मजदूर, किसान एवं आमजन की बात की। हिंदी साहित्य में समालोचक के रूप में जिस तरह से भारतेंदु हरिश्चंद्र का नाम है, उसी रूप में उर्दू अदब में हाली की ख्याति है।
महिलाओं के उत्थान एवं सशक्तीकरण में उनका नाम महात्मा ज्योतिबा फूले, सावित्रीबाई फूले, नारायण स्वामी, राजा राम मोहन राय, महर्षि दयानंद सरस्वती एवं ईश्वर चंद्र विद्यासागर की शृंखला में है। लगभग 150 वर्ष पूर्व उन्होंने महिलाओं की शिक्षा एवं सशक्तीकरण के लिए न केवल गजलों के माध्यम से बल्कि अनेक शिक्षण संस्थाओं के माध्यम से एक क्रांतिकारी संदेश दिया। वे एक उत्कृष्ट राष्ट्रप्रेमी थे, लेकिन उनका प्रेम अंध-राष्ट्रवादी नहीं था। वे अंध-राष्ट्रवाद के विरोध में थे एवं उदार विचारों के समर्थक थे। वर्तमान समय मे जब पूरा माहौल धार्मिक संकीर्णता एवं असहिष्णुता की गिरफ्त में है, ऐसे समय में हाली का जीवन, विचारधारा एवं दर्शन सर्वाधिक प्रासंगिक है। कार्यक्रम में रोजी चावला, सोनिया, शालिनी व पूजा आदि ने भी अपने विचार रखे।
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