नीरज के परिजन और गांव वासी नाचने लगे और जश्न मनाने लगे। इसके बाद दूसरे प्रयास में फिर से नीरज ने भाला 87 मीटर के पार पहुंचा दिया। इस बार जीत का जश्न दोगुना हो गया। लोग एक दूजे के गले लगकर बधाई देने लगे। तीसरे प्रयास में भाला 80 मीटर से पीछे रह गया, तो सभी लोगों के हाथ नीरज के लिए मन्नत करने के लिए उठ गए।
जीत के साथ ही फहरा तिरंगा, सभी ने किया सलाम
नीरज की जीत की घोषणा होते ही नीरज की चचेरी बहन एलईडी टीवी के पास तिरंगा लेकर पहुंची और तिरंगा हवा में लहरा दिया। इस क्षण खंडरा गांव के लोगों में देशभक्ति का जुनून देखने को मिला। सभी न एक साथ तिरंगे को सलाम किया। जय हिंद जय भारत के नारे लगाए। नीरज की तस्वीर पर फूलों की बरसात होने लगी। मौके पर लड्डू बांटे जाने लगे। जीत का ये जश्न रात को आतिश बाजियों में गजब दिखाई दे रहा था। ऐसा ही कुछ नजारा शहर के लोगों में भी देखने को मिला।
आज मेरा सिर फख्र से ऊपर है। मेरा सीना पहले से चौड़ा हो गया है। मेरे बेटे ने देश को टोक्यो ओलंपिक में पहला स्वर्ण पदक जीत कर दिया है। - सतीश चोपड़ा, नीरज के पिता।
मेरा पोता, मेरा हीरो है। आज वो पूरे देश का हीरो बन चुका है। मेरे पोते ने विश्व भर में अपने देश का नाम रोशन किया है। -धर्म सिंह, नीरज के दादा।
मुझे अपने भतीजे पर गर्व है कि आज उसने ओलंपिक में सोना हासिल कर अपना, अपने देश का नाम सुनहरे अक्षरों में लिख दिया है। - भीम सिंह, नीरज के चाचा।
यह पूरे देश के लिए फख्र की बात है कि जिले के एक नौजवान ने देश की गरिमा को बढ़ाया है। इसके लिए नीरज, उनके परिजनों, उनके कोच व शहरवासियों को बधाई। - सुशील सारवान, डीसी, पानीपत।