वर्ष 2013 में जेवलिन थ्रो की शुरुआत करने वाले हरियाणा के पानीपत जिले के गांव उग्राखेड़ी निवासी विक्रांत मलिक ने मंगलवार को कर्नाटक में मंगलूरु में आयोजित ऑल इंडिया जैवलिन थ्रो चैंपियनशिप में 77.82 मीटर भाला फेंककर स्वर्ण पदक अपने नाम किया है।
जिले में नीरज चोपड़ा के साथ ही विक्रांत मलिक की गिनती सर्वश्रेष्ठ जेवलिन थ्रोअर में की जाती है। इनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 79.50 मीटर है। विक्रांत को कोच और उनके पिता राजेंद्र मलिक अभ्यास कराते हैं। पिता फौजी हैं और उन्हें वह खेलने के लिए हमेशा प्रोत्साहित करते हैं। स्टेडियम के साथ ही पिता गांव उग्राखेड़ी में बेटे को अभ्यास कराते हैं।
पांच किलोमीटर दूर जाकर करना पड़ता है जेवलिन थ्रो का अभ्यास
विक्रांत ने बताया कि वह सप्ताह में दो से तीन दिन जेवलिन थ्रो का अभ्यास करते हैं। गांव में स्टेडियम न होने के कारण चौटाला रोड के सिवाह स्टेडियम में जाकर अभ्यास करते हैं, जोकि गांव उग्राखेड़ी से पांच किलोमीटर दूर है। चौटाला रोड पर यह स्टेडियम भी दो से तीन महीने पहले ही तैयार हुआ है। उससे पहले वह गांव में ही खेत में भाला फेंककर अभ्यास करते थे।
तीन नेशनल व सात स्टेट चैंपियनशिप में जीत चुके हैं पदक
- नेशनल चैंपियनशिप में तीन रजत
- जूनिअर नेशनल चैंपियनशिप 2013 में रजत पदक
- सीनियर नेशनल चैंपियनशिप 2018 में रजत पदक
- ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी चैंपियनशिप में रजत पदक
- ऑल इंडिया जेवलिन थ्रो 2021 में स्वर्ण पदक
- ऑल इंडिया जेवलिन थ्रो चैंपियनशिप 2022 में स्वर्ण पदक