संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हुए सब्जी विक्रेता का शव तीन दिन बाद दिल्ली पैरलल नहर में डिडवाडी के पास मिला। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को सामान्य अस्पताल पहुंचाया। वहीं परिजनों ने सुसाइड नोट के आधार पर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की, लेकिन पुलिस ने पहले से दर्ज रिपोर्ट के आधार पर शव का पोस्टमार्टम कराया और परिजनों को सौंप दिया। सुसाइड नोट को जांच के लिए मधुबन लैब भेजा जाएगा। रिपोर्ट आने के बाद आगामी कार्रवाई की जाएगी।
हरि नगर निवासी विनय ने बताया कि उसके पिता जितेंद्र कुमार (50) की पुलिस लाइन में सब्जी की दुकान है। गत 29 जुलाई की सुबह साढ़े चार बजे वह घर से सब्जी खरीदने के लिए सब्जी मंडी गए थे। वह सीधा पुलिस लाइन स्थित अपनी दुकान पर पहुंच गया था। वह सुबह छह बजे तक पिता का इंतजार करता रहा, लेकिन वह नहीं आए। उन्होंने फोन लगाया, लेकिन फोन भी नहीं मिला। विनय ने पुराना औद्योगिक थाना पुलिस को शिकायत देकर पिता की तलाश करने की अपील की थी।
पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर जितेंद्र की तलाश शुरू कर दी थी। बिजेंद्र के घर की तलाशी ली, जिसपर बेड के सिरहाने से दो पेज का सुसाइड बरामद हुआ था। जिसमें उसने लिखा था कि वह फाइनेंसरों से परेशान है। पुलिस लगातार तलाश के लिए अभियान चलाए हुए थी कि जितेंद्र की स्कूटी जाटल रोड नहर किनारे खड़ी मिली। शनिवार देर रात पुलिस को सूचना मिली कि बिजेंद्र का शव डिडवाडी के बीच दिल्ली पैरलल नहर में मिला है। वहीं परिजनों का आरोप था कि दो पुलिसकर्मियों समेत सात लोगों के दबाव में आकर जितेंद्र ने सुसाइड किया है। सभी आरोपियों पर कार्रवाई की जाए।
सुुसाइड नोट
पहले पेज में लिखा कि कुछ लोगों से मैंने मजबूरी में रुपये लिए थे, जो मैंने हर महीने मोटा ब्याज देकर चुका दिए, लेकिन वह लोग आज भी उतने ही पैसे उसकी तरफ निकाल रहे हैं। जिन्हें मैं देने में असमर्थ हूं, क्योंकि 10 जुुलाई 2021 तक भी मैं इन लोगों को ब्याज हर महीने देता था। मैं अपाहिज हूं और अब मेरा काम भी नहीं रहा। पहले युवक को 21000, दूसरे युवक को 15000, तीसरे युवक को 7500 और चौथे युवक को 3000 रुपये प्रति माह ब्याज देता था। संदीप सर मैंने आपसे मिलकर यह बातें कहने की हिम्मत भी की, लेकिन हिम्मत नहीं हुई। मेरी पुलिस लाइन के सभी साथियों को हाथ जोड़कर नमस्कार। राजेश जी आपने तो मुझे बर्बाद तभी कर दिया था, जब बच्चों से लाखों रुपये के सामान के पर्चे बनवाकर ले जाते थे।
दूसरे पेज में लिखा है कि हे मेरे पुलिस लाइन के और भी कर्मचारी, मैं सभी से माफी मांगता हूं। अभी और भी बाकी है, जिनको मैं ब्याज देता था। न मैंने किसी को पैसे ब्याज पर रुपये दे रखे हैं, मैं इन्हीं की पूंजी इन्हीं को ब्याज के रूप में देता रहा। मैं तो अपने बच्चों का भी ठीक से पोषण नहीं कर सका। मेरे बच्चों को और पत्नी मां को कोई तंग न करें। जिनको मैं ब्याज देता था पांचवें युवक को डेढ़ लाख और छठे युवक को 5000 प्रति माह देता था। इतना ब्याज देकर मैंने क्या जोड़ा, मैंने अपने बाप का कमाया हुआ भी बेच कर आपको दे दिया। मेरे नाम तो मकान भी नहीं है, नहीं तो यह भी बेच कर आपको दे देता।
पोस्टमार्टम कराकर शव परिजनों को सौंप दिया है। परिजनों की तरफ से पुलिस को दो पेज का सुसाइड नोट उपलब्ध कराया है। जिसमें कुछ युवकों का नाम लिखा हुआ है, जिनको वह ब्याज के रूप में रुपये चुकाता था। सुसाइड नोट की गहनता से जांच की जा रही है, जांच के बाद आगामी कार्रवाई की जाएगी।
-इंस्पेक्टर कमलजीत, पुराना औद्योगिक थाना प्रभारी
पानीपत। मृतक जितेंद्र द्वारा लिखा गया सोसाइड नोट पेज नंबर-1- फोटो : Panipat
पानीपत। मृतक जितेंद्र द्वारा लिखा गया सोसाइड नोट पेज नंबर-2- फोटो : Panipat