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कोरोना के दो मरीज मिले, सैंपलिंग बढ़ाने के निर्देश दिए

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कोरोना की चौथी लहर ने दस्तक दे दी है। सोमवार को कोरोना के नए दो मरीज मिले हैं। इससे पहले शुक्रवार को भी कोरोना के दो मरीज मिले थे। अप्रैल में कोरोना के पांच मरीज मिले हैं। सोमवार को मॉडल टाउन के दो युवक संक्रमित मिले हैं। इन्हें होम आइसोलेट कर दिया गया है।
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आशा वर्करों के माध्यम से रोगियों तक दवा पहुंच दी गई है। पानीपत में लैब टेक्नीशियन की कमी के कारण हर रोज महज 100-120 लोगों की ही जांच हो पा रही है। सैंपल को जांच के लिए खानपुर मेडिकल कॉलेज भेजा जा रहा है। सैंपलिंग करना स्वास्थ्य विभाग के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। यहां से तीन- चार दिन में सैंपल की रिपोर्ट मिलती है। ऐसे में कोरोना को कंट्रोल करना स्वास्थ्य विभाग के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। सिविल सर्जन ने लोगों से भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में जाने से बचने की अपील की है।
डॉक्टरों का मत है कि पानीपत में कोविड सैंपलिंग न के बराबर ही हो रही है। इसलिए कोरोना के रोगी नहीं मिल रहे। जबकि सिविल अस्पताल की ओपीडी में 20-30 हर रोज ऐसे रोगी आ रहे हैं जिसमें कोरोना के लक्षण हैं। इनमें बच्चों की संख्या अधिक है। अगर इनकी समय पर जांच हो तो कोरोना के बहुत अधिक रोगी मिल सकते हैं। इसलिए सरकार को कोरोना सैंपलिंग बढ़ानी चाहिए।
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कोरोना विंग में काम करने वाले 19 कर्मचारियों को हटा दिया गया था। इनमें आठ लैब टेक्निशयन, डाटा ऑपरेशन व रिसर्च अस्सिटेंट थे। इन्हीं पर कोरोना सैंपलिंग करना और उनकी जांच करने का जिम्मा था। ये कर्मचारी ही कोरोना के रोगियों का डाटा एकत्रित कर अधिकारियों को भेजते थे। अब लैब प्रभारी को एक कर्मचारी को ट्रेनिंग देकर उससे सैंपलिंग करानी पड़ रही है।
सोमवार को एसीएस ने प्रदेश के सभी सिविल सर्जन व कोरोना के नोडल अधिकारियों की मीटिंग ली। मीटिंग में एसीएस ने स्वास्थ्य अधिकारियों को सैंपलिंग बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। एसीएस ने अपने निर्देशों में कहा कि कोविड सैंपलिंग बढ़ाए और जहां भी कोरोना के रोगी मिलते हैं उन्हें होम आइसोलेट कर उन तक जल्द स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई जाए।
- जिले में अब तक किसी भी प्राइवेट अस्पताल ने 18 प्लस को बूस्टर डोज देने के लिए कोई रुचि नहीं दिखाई है। सरकारी अस्पतालों में अभी ये सुविधा सरकार ने शुरू ही नहीं की।
- 16 मार्च से जिले में 12 प्लस के बच्चों को डोज लगाने के कार्यक्रम में अब तक कोई खास अचीवमेंट नहीं है। एक महीना बीत जाने के बाद करीबन 13 हजार को ही डोज लगी है, जबकि इस वर्ग में करीब 60 हजार बच्चों को डोज लगनी है।
- जिले में अब तक 2 लाख 93 हजार 996 लोगों को दूसरी डोज लगना बाकि। इनमें से 2 लाख से ज्यादा को डोज लेने का समय ओवरड्यू हो गया है। इन लोगों को भी कोरोना का ज्यादा खतरा है।
सरकारी और निजी स्कूलों में 12 साल से अधिक उम्र वाले बच्चों को वैक्सीन लगाने के लिए स्वास्थ्य विभाग और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की टीम को एक्टिव कर दिया गया है। यह टीम प्रत्येक स्कूल से 12 से अधिक उम्र वाले बच्चों का डाटा तैयार करेगी और इसकी जानकारी स्वास्थ्य विभाग को देगी।
कोरोना व वैक्सीनेशन की स्थिति-
कुल सैंपल 5,33,125
कुल केस 36,058
कुल मौत 676
कुल रिकवरी
35,378
एक्टिव केस 2
पहली डोज 11,43,433
दूसरी डोज 8,49,437
बूस्टर डोज 9,060
लोगों से अपील है कि वो टीकाकरण जरूर कराएं। 12-18 साल तक के अपने बच्चों का टीकाकरण अवश्य कराएं। दूसरों को भी टीकाकरण के प्रति जागरूक करें। कोरोना से बचने के लिए टीकाकरण जरूरी है। भीड़ भाड़ वाले क्षेत्रों में जाने से बचें और मास्क का प्रयोग करें।
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डॉ. शशि गर्ग, नोडल अधिकारी कोरोना वैक्सीनेशन एवं डिप्टी सिविल सर्जन।
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