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आत्मा की प्रकृति जानने के लिए सत्य आवश्यक : सुनील जैन

Tue, 02 Sep 2025 02:04 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
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भगवान को मस्तक विराजमान कर पांडुशिला पर ले जाते श्रद्धालु। स्रोत : स्वयं
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संवाद न्यूज एजेंसी
पानीपत। जैन मोहल्ला स्थित दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में दसलक्षण पर्व के सोमवार को पांचवें दिन उत्तम सत्य धर्म के रूप में मनाया। मंदिर में महामृत्युंजय विधान में 24 तीर्थंकर भगवान को अर्घ समर्पित किए गए।
प्रधान सुनील जैन ने बताया कि दसलक्षण पर्व का पांचवां दिन उत्तम सत्य धर्म के रूप में मनाया गया। इस दौरान महामृत्युंजय विधान किया गया। यह विधान हर संकट भय का निवारण करने वाला है। उत्तम सत्य धर्म का भावार्थ है झूठ बोलना, बुरे कर्म में बढ़ोतरी देता है। सत्य जो सत शब्द से आया है इसका मतलब है वास्तविक होना। उत्तम सत्य धर्म हमें सिखाता है कि आत्मा की प्रकृति जानने के लिए सत्य आवश्यक है और इसके आधार पर ही परम आनंद मोक्ष को प्राप्त करना मुमकिन है।
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अपने मन, आत्मा को सरल और शुद्ध बना लें तो सत्य अपने आप आ जाएगा। सचिव मनोज जैन ने बताया कि दो सितंबर को सुगंध दशमी के अवसर पर 250 वर्षों से चल आ रही प्राचीन परंपरा महाआरती ( जोत ) नगर भ्रमण यात्रा का आयोजन होगा। संध्या में मॉडल टाउन जैन मंदिर में महिला मंडल और श्री दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में पारस ज्ञान संघ की ओर से सांस्कृतिक कार्यक्रम व आरती की गई।
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