पानीपत। जब दोषपूर्ण जीन बच्चों के अंदर आ जाता है तो ऐसे बच्चे हिमोफिलिया बीमारी के शिकार हो जाते है। यह बीमारी रक्त में थ्राम्बोप्लास्टिन नामक पदार्थ की कमी से होती है। सटीक दवाइयों और उचित व्यायाम से हिमोफिलिया का इलाज संभव है। उक्त जानकारी सिविल अस्पताल पानीपत के ईएनटी विभाग से डॉ. शिवांजलि ने दी।
एसडी पीजी कॉलेज में विश्व हीमोफीलिया दिवस के अवसर पर जागरूकता सेमीनार का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि सिविल अस्पताल पानीपत की ईएनटी विभाग से डॉ. शिवांजलि कालरा रहीं। प्राचार्य डॉ. अनुपम अरोड़ा, डॉ. रवि रघुवंशी, डॉ. राहुल जैन, डॉ. प्रियंका चांदना, प्रो. काजल और प्रो. शीतल ने मेहमान का स्वागत किया। डॉ. कालरा ने विज्ञान संकाय के लगभग 150 छात्र-छात्राओं के साथ जीवंत संवाद किया और उन्हें हीमोफीलिया या पैतृक रक्तस्राव के बारे में विस्तार से समझाया। इस बार के विश्व हिमोफिलिया दिवस का थीम एक्सेस फॉर ऑल रूपार्टनरशिप है।.
विदित रहे कि लोगों में हीमोफीलिया के प्रति जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से हर साल 17 अप्रैल को विश्व हीमोफीलिया दिवस मनाया जाता है जिसे देश में 17 से 30 अप्रैल तक हिमोफिलिया पखवाड़े के रूप में मनाया जा रहा है।