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आज बरसेंगे कोरड़े, उड़ेगा अबीर-गुलाल

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पानीपत। होलिका की पूजा करती हुई महिला श्रद्धालु। - फोटो : Panipat
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पानीपत। शहर भर में दो दर्जन से ज्यादा स्थानों पर वीरवार रात में होलिका दहन किया गया। सेक्टर 11-12, एल्डिको, मॉडल टाउन, आठ मरला, टीडीआई, सेक्टर 24, सेक्टर 13-17 आदि में लोगों ने होलिका पूजन कर एक-दूसरे को होली की शुभकामनाएं दीं। कई जगहों पर जमकर रंग और अबीर-गुलाल उड़ा भी। हालांकि मुख्य पर्व धुलेंडी शुक्रवार को मनाई जाएगी। जिले में फाग का खूब धमाल होगा। युवाओं की टोली गुलाल उड़ाएगी और जमकर रंग बरसेगा। भाभियां अपने देवरों पर कोरड़े बरसाएगी।
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होली को लेकर वीरवार को बाजारों में खूब भीड़ रही। चिप्स, पापड़, रंग, पिचकारी, मिठाई व अन्य खाद्य पदार्थों की दुकानों पर खरीदार उमड़े। वहीं, रग, गुलाल, पिचकारी की भी खरीदारी की गई। आचार्य जयपाल शर्मा ने बताया कि गुरुवार को पूर्णिमा की रात में होलिका पूजन के साथ दहन किया गया। 18 मार्च शुक्रवार को सुबह छह बजे से सुबह आठ बजे तक आखत डालने एवं पूजन करने का मुहूर्त है। इसी समय घरों में होलिका पूजन एवं आखत डालने का शुभ समय है। उधर लोगों ने फाग को लेकर तैयारियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया।
वीरवार को होली के दिन पूजा के लिए जहां बल्लियों की जमकर बिक्री हुई। तो वहीं गन्ना, हरे चने व गेहूं की बालियां भी खूब बिकीं। इस दौरान प्रति गन्ना 20 रुपये तो हरे चने 15 से 20 रुपये प्रति गट्ठर बिके। गेहूं की बालियां भी 10 रुपये में पांच बिकीं। गोबर की बल्लियों के दाम भी महंगे रहे, जिसमें 100 रुपये की 100 बल्लियां बिकीं। हालांकि होली जलाने के दौरान पूजा के लिए यह सभी बहुत ही जरूरी चीजें होने के चलते इनकी जमकर बिक्री हुई।
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दूसरी ओर बाजार में भी जबरदस्त रौनक दिखी। रंगों के साथ खाने-पीने के सामान की दुकानों पर भी ग्राहकों की भीड़ रही। कई जगह पर लोगों ने होली के लिए बिक रहे होली के टाइटल वाले कपड़ों की भी खरीदारी की।
हर्षोल्लास से मनाया होली मिलन समारोह
होली पर्व पर जिले की विभिन्न संस्थाओं की ओर से होली मिलन समारोह व फाग महोत्सव हर्षोल्लास के साथ मनाया। इसके अंतर्गत महिलाओं ने फाग गीत गाते हुए गुलाल व फूलों से होली खेलकर एक दूसरों को होली पर्व की अग्रिम शुभकामनाएं दी। महिलाओं ने अपने-अपने फाग गीत सामूहिक गए। फाग गीत गाने के बाद महिलाओं ने सर्वप्रथम भगवान श्रीकृष्ण को गुलाल लगाया। इसके बाद आपस में फूल तथा गुलाल से होली खेल एक-दूसरे को शुभकामनाएं दी।
क्या है धुलेंडी
धुलेंडी को धुरड्डी, धुरखेल, धूलिवंदन और चैत बदी आदि नामों से जाना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, त्रेता युग के आरंभ में भगवान विष्णु धूलि वंदन किया था। तभी से इस दिन धूलिवंदन अर्थात एक-दूसरे पर धूल लगाने की पंरपरा शुरू हुई। इसी कारण ही इस दिन को धुलेंडी कहा जाता है। प्राचीन समय में लोग जब एक-दूसरे पर धूल लगाते थे तो उसे धूलि स्नान कहा जाता था। आज भी कई जगहों पर ऐसा होता है। पहले लोग शरीर पर चिकनी या मुल्तानी मिट्टी भी लगाया करते थे। इसके अलावा पहले के समय में इस दिन धूल के साथ टेसू के फूलों के रस से बने हुए रंग का उपयोग किया जाता था और रंगपंचमी पर अबीर गुलाल से होली खेली जाती थी। वर्तमान समय में धुलेंडी का रूप बदल गया है, लोग इस दिन भी रंगपंचमी के उत्सव की तरह ही रंगों से उत्सव मनाते हैं।
गले मिलने की पंरपरा
कहा जाता है कि जब भक्त प्रहलाद को मारने के सभी प्रयास असफल हो गए तो हिरण्यकश्यप ने बहन होलिका से सहायता मांगी। होलिका को अग्नि में न जलने का वरदान प्राप्त था। वह प्रहलाद को लेकर अग्नि में बैठ गई, लेकिन विष्णु जी की कृपा से भक्त प्रहलाद का बाल भी बांका नहीं हुआ और होलिका भस्म हो गई। इस खुशी में लोग एक-दूसरे के गले मिलने लगे। इसी से यह परंपरा बन गई।
होली पर सावधान भी रहें
होली पर रासायनिक रंग सेहत को नुकसान भी पहुंचा सकते हैं। इसलिए सभी को सावधान रहने की भी जरूरत है। त्वचा, आंखें और बालों को नुकसान पहुंच सकता है। ऐसे में सतर्कता बरतनी जरूरी है। मुंह पर लगाए जाने वाले गुलाल और रंगों का सीधा असर आंखों पड़ सकता है। यदि पेट में यह चला जाए तो लीवर को भी नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए सभी के लिए बेहतर होगा कि प्राकृतिक रंगों का ही प्रयोग करें।
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इन बातों का रखें ख्याल
होली खेलने के पहले बालों सहित पूरी त्वचा पर सरसों का तेल लगाएं।
होली खेलने के बाद नहाएं और फिर नारियल या बादाम का तेल लगाएं।
इको फ्रेंडली रंग और गुलाल ही खरीदें। इन्हें खरीदते समय गुणवत्ता चेक करें।
यदि आप चश्मा या कॉन्टैक्ट लेंस पहनते हैं तो उसे हटाकर ही रंग खेलें।
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