समालखा। नई अनाज मंडी स्थित जैन स्थानक में उपेंद्र मुनि ने कुल के संस्कारों का मनुष्य के जीवन पर प्रभाव होता है। साथ ही उन्होंने बताया कि प्रत्येक मानव जीवन पर उसके कुल के संस्कारों का विशेष प्रभाव रहता है। फिर भले ही उसका जन्म उच्च कुल में, मध्यम कुल में या निम्न में हुआ हो लेकिन अपुन यहां भगवान महावीर स्वामी द्वारा बताए गए उच्च कुल व उच्च जाति का चिंतन करना चाहेंगे।
उन्होंने बताया कि जिसके पिता का जीवन आदर्श हो। जिसके पिता का जीवन अंडे, मांस व शराब से दूर हो व जो अपने नाखूनों की कमाई से परिवार का पालन पोषण करता हो। उसके माध्यम से जन्मी संतान उच्च जाति की कहलाती है व जिसकी माता पतिव्रत हो, चरित्र निष्ठ हो, विशुद्ध धर्माचरण करने वाली को उसकी कुक्षि से जन्मी संतान उच्च कुल में जन्मी संतान कहलाती है।कुल के संस्कारों का अवलोकन करते समय देखा जाता है कि अमुक व्यक्ति का जीवन हेय, ज्ञेय, उपादेय कैसा है। कुल के जाति के संस्कार जबरदस्त होते हैं। वर्तमान में उत्पन्न होने वाले बच्चों को कुल, जाति व धर्म के संस्कारों से वंचित ही रखा जाता है। बच्चों के माता-पिता उन्हें विदेशी वेषभूषा, भाषा और अत्याधुनिक रहन सहन से अभ्यस्त कर देते हैं।