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खुशहाली के दीपक रोशन, हुआ गणेश-लक्ष्मी पूजन

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पानीपत। दिपावली के अवसर पर रंगोली बनाती हुई वैदिका शर्मा व ज्योती। - फोटो : Panipat
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पानीपत। उल्लास और दीपों का पर्व दीपावली का त्योहार वीरवार को देश-प्रदेश सहित जिलेभर में हर्षोल्लास और उमंग के साथ मनाया गया। लोगों ने घरों और प्रतिष्ठानों को दीपों और झालरों से सजाया। शाम होते होते घर, प्रतिष्ठान सहित अन्य भवन प्रकाश से नहा उठे। शाम को पारंपरिक ढंग से शुभ-मुहूर्त में श्रद्धा से गणेश-लक्ष्मी और कुबेर की पूजा की और घर में खुशहाली और धनधान्य की कामना की। वहीं, गली-मोहल्ले और रिश्तेदारों के यहां मिठाई बांटकर दीपावली की शुभकामनाएं दीं। फेसबुक, व्हाट्सएप, ट्विटर पर भी दिवाली के शुभकामना संदेश की खूब आवाजाही रही।
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वीरवार को दीपावली पर्व पर सुबह से ही लोग खरीदारी के साथ पूजा की तैयारी में लगे रहे। सुबह हनुमान जी की पूजा की और प्रसाद का वितरण किया। शाम को घरों में भगवान गणेश व मां लक्ष्मी की पूजा की गई। मान्यता है कि भगवान श्रीराम 14 वर्ष का वनवास काटने के बाद अयोध्या लौटे तो लोगों ने खुशी में दीये जलाए। इसके अलावा दिवाली मनाने को लेकर ओर भी मान्यताएं हैं। कहा जाता है कि कृष्ण ने कार्तिक अमावस्या के दिन नरकासुर का वध किया था। लक्ष्मी जी इसी दिन समुद्र से प्रकट हुई थीं।
छोटे-बड़े व्यापारियों ने भी अपने प्रतिष्ठानों पर लक्ष्मी का पूजन किया। ग्रामीण क्षेत्रों में भी पर्व की धूम रही। इस बार अधिकांश लोगों ने घरों में मिट्टी के दीये और मोमबत्ती चलाकर अंधेरे को मिटाया। झालर और बल्ब की भी सजावट खूब रही। पूजन के बाद लोगों ने गली-मोहल्लों में उपहार देकर लोगों को दीपावली की शुभकामनाएं दी। मंदिरों में पूजा अर्चना करने के लिए तांता लगा रहा। खरीदारी के लिए बाजारों में भारी भीड़ रही।
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बच्चों व युवाओं ने जमकर की आतिशबाजी
दीपावली के पर्व को लेकर बच्चों में अलग ही उत्साह देखने को मिला और बच्चे, युवा और बड़ों ने जमकर आतिशबाजी की। चकरी, लड़ी, अनार, सुतली बम, मुर्गा झाप, पेंसिल, बीड़ी बम, रॉकेट आदि फोड़े। बच्चे और युवाओं ने रंग-बिरंगी पोशाक पहनकर त्योहार को मनाते नजर आए। लोग देर रात तक पटाखे आतिशबाजी का जमकर लुफ्त उठाते रहे। ग्रामीण क्षेत्र में भी जमकर आतिशबाजी हुई, जिसमें लोगों ने खूब आंनद उठाया। दीपावली पर पटाखों की भरमार रही।
गोवर्धन की पूजा कर लगाया अन्नकूट का भोग
शुक्रवार को भगवान गोवर्धन की पूजा की गई। सुबह महिलाओं ने गोबर से गोवर्धन का प्रतीक बनाकर पूजा-अर्चना की। हालांकि अधिकतर ग्रामीण क्षेत्रों में दीवाली के दिन ही गोवर्धन पूजा की। मंदिरों में भगवान को अन्नकूट का भोग लगाया गया तथा श्रद्धालुओं में अन्नकूट का प्रसाद वितरित की। किसान वर्ग ने अपने पशुधन का पूजन किया। आधुनिक युग में उपयोग में रहे कृषि यंत्रों का पूजन किया गया।
पटाखों के शोर में दबकर रह गए एनजीटी और प्रशासन के आदेश
एनजीटी व प्रशासन के आदेश पटाखों में शोर में दबकर रह गए। प्रदेश के अन्य जिलों के साथ ही पानीपत जिले में भी पटाखों पर रोक थी। बावजूद रोक का असर कहीं दिखाई नहीं दिया। हालांकि खुले आम तो पटाखों के स्टाल दिखाई नहीं दिए, लेकिन दुकानदार चोरी-छिपे, कहीं-कहीं तो खुलेआम पटाखे बेचते रहे। लोगों ने ऑनलाइन भी पटाखों की बिक्री की। दीपावली पर देर रात तक आतिशबाजी होती रही जिसका असर शुक्रवार सुबह देखने को मिला। आबोहवा जहरीली हो गई। जहरीली हवा के कारण बुजुर्ग व श्वास रोगी खासे परेशान रहे। दीपावली के दिन शाम के समय पटाखों का शोर एकाएक बढ़ गया जो देर रात तक जारी रहा। जिला प्रशासन की तरफ से दावे किए गए थे कि क्षेत्र में पटाखों की बिक्री रोकने के लिए टीमें बनाई गई हैं, लेकिन क्षेत्र में प्रशासन की कोई टीम नजर नहीं आई जिसके चलते आतिशबाजी करने वालों पर नकेल नहीं कसी जा सकती।

पानीपत। दिपावली के अवसर पर पटाखे जलाते हुए।- फोटो : Panipat

पानीपत। सिविल अस्पताल में दिपावली की रात को भी मौजूद रहे चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी, मोमबत्ती जलाते ?- फोटो : Panipat

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