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बांग्लादेश से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए पानीपत में पहली बार होने वाली दुष्कर्म पीड़िता की गवाही टली

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पानीपत। बांग्लादेश से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए पानीपत कोर्ट में गवाही देने वाली दुष्कर्म पीड़िता को अब तीन माह और इंतजार करना पड़ेगा। बांग्लादेश दूतावास ने वीडियो कांफ्रेंसिंग से पहले पीड़िता की सुरक्षा के लिए गृह मंत्रालय को पत्र भेजकर नौ बिंदुओं पर जानकारी मांगी है। गृह मंत्रालय ने डीजीपी पंचकूला और डीजीपी ने एसपी को पत्र भेज जानकारी देने का आदेश दिया है। एसपी ने तहसील कैंप चौकी इंचार्ज को बिंदुओं की जानकारी जुटाने के आदेश दिए। लंबी प्रक्रिया की वजह से जांच अधिकारी ने न्यायाधीश सुमित गर्ग से सभी जानकारी जुटाने के लिए समय मांगा है। न्यायाधीश ने फैसला सुनाते हुए तीन माह बाद की तारीख दे दी है। अब नौ नवंबर 2021 को पीड़िता की गवाही होगी।
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गौरतलब है कि बांग्लादेश की युवती वारदात के समय 17 वर्ष की थी। वह पढ़ाई छोड़कर ढाका में नौकरी करती थी। ऑफिस के ही एक युवक से उसकी दोस्ती हुई। वह उसे शादी का झांसा देकर और ब्यूटी पार्लर का काम सिखाने के बहाने दिल्ली लेकर आया। तीन दिन कमरे में रखने के बाद उसे रोहिणी में एक सेक्स रैकेट चलाने वाले राहुल दादा उर्फ इंद्रजीत राय और उसकी पत्नी खुशी राय को सौंप दिया था।
दंपती ने कुछ दिन रखने के बाद उस पर गलत काम करने का दबाव बनाया। धमकी दी कि काम न करने पर उसे जान से मारवा देंगे। इसके बाद राहुल दादा से पानीपत के तहसील कैंप की तेज कॉलोनी निवासी मनु उर्फ नरेंद्र ने लड़की की मांग की। चार मई 2019 को राहुल युवती को लेकर पानीपत बस स्टैंड लेकर पहुंचा। वहां राहुल दादा ने 11 हजार रुपये लेकर मनु और उसके दोस्त भगत नगर निवासी अजय को दो दिन के लिए लड़की सौंप दी। मनु और अजय उसे अजय के मकान पर लेकर गए। वहां पर शराब पी और फिर पहले अजय ने युवती के साथ गलत काम किया। मनु बाहर खड़ा रहा। इसके बाद युवती बाथरूम का बहाना बनाकर पड़ोसी के मकान में जाकर छिप गई। पड़ोसी महिला को आपबीती बताने पर पूरे मामले का खुलासा हुआ। पांच मई 2019 को शहर थाना पुलिस ने पॉक्सो एक्ट, रेप, मानव तस्करी और अन्य धाराओं के तहत रिपोर्ट दर्ज कर की थी।
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पुलिस ने चारों आरोपियों को किया था गिरफ्तार, युवती को भेजा था घर
पुलिस ने दिल्ली में सेक्स रैकेट चलाने वाले आरोपी राहुल दादा, उसकी पत्नी खुशी, पानीपत के रहने वाले मनु उर्फ नरेंद्र और अजय को गिरफ्तार कर लिया था। वहीं सीडब्ल्यूसी के प्रयास से 23 नंबवर 2019 को युवती को एक एनजीओ के माध्यम से बांग्लादेश भेज दिया गया था। फिलहाल अजय जेल में है और अन्य तीन जमानत पर बाहर हैं।
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