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Panipat News: यमुना में कई घंटे खड़े होकर किया यज्ञोपवीत जनेऊ श्रावणी उपाकर्म

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श्रावणी उपाक्रम पर विशेष पूजा करते ब्राह्मण। सोशल मीडिया
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संवाद न्यूज एजेंसी
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सनौली। नन्हेड़ा गांव में यमुना नदी के घाट पर श्रावणी पूर्णिमा को कई घंटे यमुना में खड़े रहकर पूजा की गई और यज्ञोपवीत जनेऊ की भी पूजा अर्चना कर बदला गया। इस दौरान सुशील शास्त्री अहर व भारत शास्त्री ने पूर्णिमा के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वैसे तो हर महीने की पूर्णिमा खास होती है और अधिकतर पर महत्वपूर्ण त्योहार मनाए जाते हैं। लेकिन सावन पूर्णिमा इन सब में विशेष है। इस दिन बहनें अपने भाइयों को राखी बांधती हैं। इसी के साथ इस श्रावणी पूर्णिमा पर जनेऊ बदला जाता है।
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सुशील शास्त्री अहर व भारत शास्त्री ने बताया कि सूत से बने जनेऊ के धागे ब्रह्मा, विष्णु और महेश के प्रतीक होते हैं। इसे देवऋण, पितृऋण और ऋषिऋण या फिर सत्व, रज और तम के साथ तीन आश्रमों का भी प्रतीक माना जाता है। हिंदू धर्म में इसके बगैर विवाह का संस्कार नहीं होता है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार जनेऊ पहनने से बुरे सपने नहीं आते। जनेऊ पहनने वाला व्यक्ति सफाई के नियमों से बंधा रहता है। मान्यता है कि पवित्रता बनाए रखने के लिए इसे कान में लपेटते हैं तो दिमाग की नसें एक्टिव हो जाती हैं। याददाश्त तेज होती है। इससे पहनने से व्यक्ति के पास बुरी शक्तियां नहीं आती और व्यक्ति का मन बुरे काम में नहीं लगता। इस मौके पर पालेराम, भगतराम, संदीप व बलबीर मौजूद रहे।
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