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केंद्रीय महिला एवं बाल विकास की 8 सालों की समीक्षा करने नहीं पहुंची केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी

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पानीपत। केंद्रीय महिला एवं बाल विकास विभाग की पिछले आठ वर्षों की उपलब्धियों समीक्षा करने मंगलवार को केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को आना था लेकिन वह नहीं पहुंच सकीं। इसके बाद राज्यमंत्री डॉ. मुंजपारा महेंद्र भाई और कमलेश ढांडा ने सरकारी योजनाओं पर विस्तृत समीक्षा की। समालखा में आयोजित कार्यक्रम में डॉ. मुंजपारा ने कहा कि प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना में गर्भवती महिलाओं को दी जाने वाली राशि अब तीन की बजाय दो किस्तों में दी जाएगी। यही नहीं यदि महिला को दूसरी संतान बेटी होती है तो उसे छह हजार रुपयेदिए जाएंगे। पिछले आठ वर्षों में महिलाओं, बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा, उनके सशक्तीकरण, पोषण आदि विषयों से जुड़ी योजनाओं के माध्यम से लोगों को लाभ मिला है। डॉ. मुंजपारा ने कहा कि पूरे देश में 2245 बाल देखरेख संस्थान और 781 वन स्टॉप सेंटर चल रहे हैं। विदेशों में भी भारत की महिलाओं को सशक्त करने के लिए 10 वन स्टॉप सेंटर खोले गए हैं, जिनमें और इजाफा किया जाएगा।
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महिला एवं बाल विकास मंत्रालय भारत सरकार के सचिव डॉ. इंदीवर पांडेय ने कहा कि शन शक्ति, मिशन वात्सालय, प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना, जेजे एक्ट आदि में जोर-शोर से काम किया जा रहा है। बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ योजना 100 शहरों में शुरू की गई थी। यह 640 जिलों में चलाई जा रही है।
डॉ. इंदीवर पांडेय ने कहा कि प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना में दो करोड़ 78 लाख लाभार्थियों को लाभ दिया जा रहा है। वन स्टॉप सेंटर से घरेलू हिंसा के मामले सुलझे हैं। यह योजना एनआरआई के लिए भी विदेशों में शुरू की जा रही है। वीमेन हेल्प लाइन के माध्यम से अब तक करीब 70 लाख कॉल्स अटेंड की जा चुकी हैं। निर्भया योजना के तहत 726 फास्ट कोर्ट में 96 हजार 736 केस डिस्पोज किए गए हैं। 64 नए वर्किंग वीमेन हॉस्टल स्वीकृत किए गए हैं, जिन पर 153.67 करोड़ रुपये खर्च आएगा।
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बताया कि पीएम केयर फॉर चाइल्ड योजना के तहत चार हजार 345 पात्र बच्चों को लाभ दिया जा रहा है। इसके लिए पूरे देश के 557 जिलों में से नौ हजार 20 आवेदन आए थे। इन सभी बच्चों का पूरा डाटा पोर्टल पर तैयार किया गया है। इनके पालन पोषण की जिम्मेदारी सरकार वहन कर रही है। यह योजना उन बच्चों के लिए वरदान साबित हुई है।
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