पानीपत। बेमौसमी बारिश के बाद धान में खेत से लेकर मंडी तक नुकसान हुआ है। मंडी में किसानों की ढेरी के साथ एजेंसियों की खरीदी धान भीग गई है। इसमें जमाव होने का खतरा बढ़ गया है। वहीं खेतों में धान की फसल गिरने से नुकसान का आकड़ा भी बढ़ गया है। किसानों ने 20 से 25 तक नुकसान का आकलन किया है। वहीं खेतों में खड़ी पीआर धान की फसल में नुकसान अधिक है। वहीं मंडियों में बुधवार को अपेक्षाकृत खरीद नहीं हो सकी। शेड के नीचे की इक्का-दुक्का ढेरी ही खरीदी जा सकी। किसान धान को सुखाने में लगे रहे।
मंडियों में अब तक 86722 मीट्रिक टन धान की आवक हुई है। जिसमें 78754 मीट्रिक टन धान की खरीद की है। मंडियों से अब तक 2213 मीट्रिक टन धान का उठान हो पाया है। बुधवार को मंडियों में धान की खरीद कार्य गति नहीं पकड़ पाया। किसानों ने सुबह ही आसमान को देखकर धान को सुखाना शुरू कर दिया। मंडी में भीगे धान में नमी बढ़ गई है। किसान मौसम साफ होने पर एक सप्ताह में सूखा पाएंगे। सिवाह गांव के अजमेर और निरंजन व पलड़ी गांव के राजबीर ने बताया कि धान की मंडी में आकर भी खरीद नहीं की जा रही है। यह प्रशासन की अनदेखी के चलते हो रहा है। किसानों को बारिश आने पर तिरपाल तक नहीं मिल पाता। मार्केट कमेटी पानीपत की सचिव आशा देवी ने बताया कि मंडी में किसानों को किसी भी तरह की परेशानी नहीं होने दी जा रही है। मंडी में व्यापक प्रबंध किए गए हैं।
खड़ी फसल में ज्यादा नुकसान
किसानों को मंडी से अधिक खेतों में खड़ी फसल में ज्यादा नुकसान है। शहरमालपुर के किसान सत्यनारायण और हरपाल ने बताया कि मंगलवार शाम को बारिश का पानी धान के खेतों में खड़ा है। अब दूसरे खेतों में भी पानी नहीं उतर पा रहा है। इससे धान खराब होने का खतरा बढ़ गया है। जमीन पर लगी बाली खराब हो जाएंगी। वहीं पीआर धान में नुकसान बढ़ गया है। कृषि विभाग के उपमंडल अधिकारी डॉ. देवेंद्र कुहाड़ ने बताया कि किसानों को खेत में पानी खड़ा नहीं होने देना चाहिए। इसको दूसरे खेतों में उतार देना चाहिए। पानी खड़ा होने से नुकसान बढ़ सकता है।