माई सिटी रिपोर्टरपानीपत। केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और संयुक्त किसान मोर्चा के देशव्यापी आह्वान पर सोमवार को किसान, मजदूर और कर्मचारी संगठनों ने जिला सचिवालय पर सामूहिक गिरफ्तारी दी। जेल भरो आंदोलन और सत्याग्रह के तहत कार्यकर्ताओं ने शहर में प्रदर्शन कर जिला लघु सचिवालय पहुंचकर गिरफ्तारी दी। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल हुईं।
यूनियनों ने करीब 350 गिरफ्तारी का दावा किया, जबकि थाना शहर पुलिस ने करीब 150 प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारी बताई। प्रशासन के पास प्रदर्शनकारियों की संख्या के मुकाबले बसें कम होने के कारण गिरफ्तार लोगों को मौके पर ही निजी मुचलके पर रिहा कर दिया गया।
प्रदर्शन में आशा वर्कर, मिड-डे मील, आंगनबाड़ी, क्रैच, ग्रामीण सफाई कर्मचारी, इंडस्ट्रियल वर्कर, किसान सभा, खेत एवं ग्रामीण मजदूर यूनियन, ऐटक और सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा से जुड़ी यूनियनें शामिल हुईं। नगर पालिका, फायर ब्रिगेड, बिजली बोर्ड, पब्लिक हेल्थ, हुडा और पशुपालन विभाग के कर्मचारी भी प्रदर्शन में पहुंचे।
सीटू के राज्य सचिव एवं संयुक्त किसान मोर्चा के जिला सह-संयोजक सुनील दत्त, किसान सभा के जिला प्रधान डॉ. सुरेंद्र मलिक, राजपाल, बंटी, सुशीला, निर्मल अहलावत, नूतन, जय भगवान, रामकुमार यादव, कश्मीर सिंह और अमरीश त्यागी ने कर्मचारियों को संबोधित किया।
थाना शहर प्रभारी देवेंद्र ने बताया कि जिला सचिवालय पर करीब 150 कर्मचारियों की गिरफ्तारी की गई थी। बाद में सभी को मौके से ही छोड़ दिया गया। प्रदर्शनकारियों ने श्रमिकों और किसानों से जुड़ी मांगों को जल्द पूरा करने की मांग की। वक्ताओं ने कहा कि लंबे समय से कर्मचारियों और मजदूरों की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ है, जिसके चलते आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ रहा है।
यूनियनों ने सौंपा 10 सूत्री मांगपत्र
प्रदर्शन के बाद यूनियन नेताओं ने एसडीएम मनदीप कुमार और तहसीलदार मनोज को 10 सूत्री मांगपत्र सौंपा। इसमें चारों श्रम संहिताएं रद्द करने, अमेरिका के साथ कृषि समझौता समाप्त करने और फसलों पर एमएसपी की कानूनी गारंटी लागू करने की मांग की गई। इसके अलावा बिजली संशोधन अधिनियम रद्द करने, स्मार्ट व प्रीपेड मीटर पर रोक, मनरेगा में 300 दिन रोजगार और 800 रुपये प्रतिदिन मजदूरी तय करने की मांग रखी गई। सरकारी विभागों का निजीकरण रोकने, आशा, आंगनबाड़ी, मिड-डे मील व क्रैच वर्करों समेत सभी कच्चे व स्कीम वर्करों को पक्का करने, उद्योगों में ठेकेदारी प्रथा समाप्त करने, न्यूनतम वेतन 30 हजार रुपये प्रतिमाह करने और खाली सरकारी पदों पर स्थायी भर्ती की मांग भी की गई।
50 बसों की जरूरत थी प्रशासन के पास दो ही
सुनील दत्त ने कहा कि प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारी के लिए प्रशासन के पास केवल दो बसें थीं, जबकि कम से कम 50 बसों की जरूरत थी। एसडीएम, ड्यूटी मजिस्ट्रेट तहसीलदार और डीएसपी की मौजूदगी में गिरफ्तारी की कार्रवाई हुई। बाद में प्रदर्शनकारियों को निजी मुचलके पर रिहा करने के आदेश दिए गए।