पानीपत। प्रॉपर्टी आईडी शहर के लोगों के लिए मुसीबत बन चुकी है। याशी कंपनी के छह साल पहले शुरू सर्वे में करीब 1.85 लाख प्रॉपर्टी सामने आई थी। इसके बाद सर्वे पर सवाल उठे और गलतियां सामने आने लगीं। कंपनी के जाने के बाद नगर निगम की ओर से ठीक किया जाने लगा। इन सालों में कई बार नियम और व्यवस्था बदली। लोगों की प्रॉपर्टी आईडी ठीक होने की बजाय परेशानी का कारण बन गई।
निगम के कुछ अधिकारियों व कर्मचारियों ने दलालों का सहारा लेना शुरू कर दिया। सीएम फ्लाइंग की टीम कई बार दबिश देकर मामले उजागर कर चुकी है। दो दिन पहले एक कच्चे क्लर्क को आठ हजार रुपये की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया था। अब भी निगम में इसको लेकर किसी प्रकार का सुधार नजर नहीं आ रहा है।
पहले निगम अपने स्तर पर प्रॉपर्टी का सर्वे करती थी। 2018 में याशी कंपनी से इसका सर्वे कराया गया। कंपनी ने करीब 1.85 लाख प्रॉपर्टी आईडी दिखाई। इनमें से करीब 75 हजार में गलती सामने आई। लोग इनको ठीक कराने के चक्कर लगाने लगे। इन सालों में अब तक प्रॉपर्टी आईडी ठीक नहीं हो पाई।
नगर निगम के देवीलाल कांप्लेक्स और पालिका बाजार स्थित कार्यालय के नजदीक दलाल सक्रिय हैं। ये लोग निगम में आने वाले लोगों पर नजर रखते हैं या फिर फाइल बनवाने आने वाले लोगों के साथ पहले की संपर्क कर लेते हैं। वे प्रॉपर्टी आईडी कम समय में ठीक कराने का भरोसा देते हैं। इसके बाकायदा अलग-अलग रेट तय है। वे इसी के आधार पर सुविधा शुल्क मांगते हैं।
सेक्टर-12 निवासी अशोक कुमार ने बताया कि उसके एक प्लाॅट का क्षेत्रफल 150 वर्ग गज है, लेकिन प्रॉपर्टी आईडी में 110 वर्ग गज दिखाया गया है। वह अब प्लॉट बेचना चाहता है, लेकिन पूरा क्षेत्रफल बिना प्लॉट बेच नहीं सकते। निगम में कई बार चक्कर काटने के बाद भी गलती ठीक नहीं की जा सकी है।
वर्जन :
प्रॉपर्टी आईडी का सर्वे कराया गया था। इसके बाद त्रुटियों को ठीक किया जा रहा है। ऑनलाइन सिस्टम पर अलग-अलग कैटेगरी में इनको सुधार किया जा रहा है। शाखा में सावधानी बरती जा रही हैं।
अरुण भार्गव, डीएमसी