स्वास्थ्य विभाग ने निजी अस्पतालों को डेंगू के मरीजों की रिपोर्ट और सैंपल भेजने के आदेश दिए थे। जिससे सिविल अस्पताल में जांच की जा सके। इसके बाद जिले के 17 निजी अस्पतालों ने 844 डेंगू के संदिग्ध रोगियों के सैंपल जांच के लिए भेजे, जबकि डेंगू के नाम पर अधिक मरीज दाखिल किए गए थे। इन 844 सैंपलों में से महज 82 मरीज ही डेंगू के रोगी मिले। स्वास्थ्य विभाग की मानें तो निजी अस्पताल डेंगू का भय दिखाकर मरीजों को भर्ती कर रहे हैं।
वहीं सिविल अस्पताल समेत छह सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों ने 2208 सैंपल की जांच की है। इनमें 67 की रिपोर्ट पॉजिटिव मिली। खानपुर मेडिकल कॉलेज से 18 सैंपल की रिपोर्ट पॉजिटिव मिली। जबकि एक पॉजिटिव रिपोर्ट कैथल से मिली है। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक शहर के पांच बड़े अस्पतालों डेंगू के हजार से ज्यादा संदिग्ध रोगियों का इलाज हुआ है। इन अस्पतालों से 604 लोगों के सैंपल स्वास्थ्य विभाग को भेजे गए, लेकिन दोबारा हुई जांच में 49 की रिपोर्ट ही डेंगू पॉजिटिव मिली।
इन निजी अस्पतालों ने इतने भेजे सैंपल-
अस्पताल सैंपल पॉजिटिव
आहूजा अस्पताल 46 05
बद्रीनाथ अस्पताल 10 09
बतरा अस्पताल 66 09
छाबड़ा अस्पताल 17 01
चिरायु अस्पताल 11 01
गलेक्सी अस्पताल 06 00
हैदाबादी अस्पताल 54 15
जितेंद्र अस्पताल 02 00
मलिक अस्पताल 15 01
पार्क अस्पताल 09 00
रेनबो अस्पताल 05 02
रविंद्रा अस्पताल 530 34
एसएन अस्पताल 13 02
अग्रसेन अस्पताल 17 00
सुनील अस्पताल 02 00
तलवार अस्पताल 03 00
सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों से आए सैंपल:
केंद्र सैंपल पॉजिटिव
सिविल अस्पताल 907 45
बापौली सीएचसी 80 06
खोतपुरा सीएचसी 234 04
नौल्था सीएचसी 01 00
समालखा अस्पताल 123 11
हरिसिंह कॉलोनी 16 01
बड़ा सवाल, क्या सिर्फ 17 अस्पतालों में ही हुई डेंगू की जांच
जिले में 140 निजी अस्पताल हैं। इनमें से सिर्फ 17 अस्पतालों ने ही ये बताया है कि उनके यहां डेंगू रोगियों का इलाज हुआ हे। अब सवाल ये है कि क्या 140 में से महज 17 अस्पतालों ने ही डेंगू के इलाज के लिए मरीजों को दाखिल किया।
सिविल अस्पताल में डेंगू के डर से हो रहे सैंपल
सिविल अस्पताल में वायरल से पीड़ित लोगों की ओपीडी 250-300 के बीच में है। सिविल अस्पताल में हर रोज 40-50 एलाइजा टेस्ट हो रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि बिना लक्षण के भी लोग डेंगू का टेस्ट कराने की जिद करते हैं। साधारण वायरल में भी डेंगू का डर रहता है।
वायरल का मतलब डेंगू नहीं-
वायरल रोगियों में बच्चों की संख्या अधिक है। डॉ. जितेंद्र त्यागी ने बताया कि मौसम में अचानक हुए बदलाव से वायरल के रोगी बढ़े हैं। वायरल का मतलब डेंगू नहीं होता, लोगों को यह समझने की जरूरत है। इस मौसम में अपना व बच्चों का ख्याल रखे और ठंडी चीजों से परहेज करें। प्लेटलेट्स गिरने का मतलब भी डेंगू नहीं होता।
सिविल अस्पताल में महज एक रोगी हुआ दाखिल-
जिले में अब तक डेंगू के 168 केस मिल चुके हैं लेकिन इनमें से महज एक रोगी ही सिविल अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचा है। अन्य सभी मरीजों का इलाज निजी व खानपुर मेडिकल कॉलेज में हुआ है। सिविल अस्पताल महज डेंगू के टेस्ट की कंफर्म रिपोर्ट जांचने तक ही सीमित रह गया है। डॉक्टर जिले भर से रोगियों के सैंपल आने के बाद एक ही दिन में दो किट के सैंपल लगाता है। एक किट में 94 सैंपल जांच के लिए लगते हैं। इसलिए मरीजों को डेंगू के अनुसार इलाज लेने के लिए 3-4 दिन इंतजार करना पड़ता है। सिविल अस्पताल में ऐसे 35 मरीज दाखिल हुए हैं जिनकी प्लेटलेट्स गिर गई थी।
घटते-बढ़ते रहे डेंगू केस-
2016- 12
2017- 469
2018- 133
2019- 04
2020- 272
2021- 168 (11 नवंबर तक)
निजी अस्पतालों को हर मरीज की रिपोर्ट भेजने के निर्देश
डेंगू को लेकर भय का माहौल न बनाएं। निजी अस्पतालों को निर्देश दिए गए हैं कि वे हर मरीज की रिपोर्ट उनके पास भेजें। जो भी मरीज वहां दाखिल हो रहा है, उसकी जानकारी स्वास्थ्य विभाग के पास होनी चाहिए। डेंगू से डरने की बजाए जागरूकता जरूरी है।
- डॉ. जितेंद्र कादियान, सिविल सर्जन, पानीपत