पानीपत। शहरवासियों को अभी तक प्रॉपर्टी टैक्स के बिल तक नहीं बंटे थे कि निगम ने एजेंसी को इस काम का भुगतान करने की तैयारी कर ली है। एजेंसी निगम क्षेत्र के करीब 30 हजार खाली प्लाटों को भी बिल देने का दावा किया है। वहीं, शहर के कई कॉलोनियों में रिहायशी एरिया तक में लोगों को ये बिल नहीं मिले हैं। एक बिल देने के एवज में एजेंसी निगम से 21 रुपये का भुगतान वसूल कर रही है। मामला संज्ञान में आने के बाद वरिष्ठ उप महापौर ने इस पर सख्ती दिखाई और निगम आयुक्त को भुगतान रोकने के लिए पत्राचार किया है। उन्होंने कहा कि जब तक नगर निगम सदन इसकी मंजूरी न दे तब तक एजेंसी का भुगतान न किया जाए।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण एरिया में खाली प्लाटों के मालिकों को ढूंढना असंभव काम है, जबकि एजेंसी इन खाली प्लाटों को टैक्स के बिल बांटने का दावा कर रही है। वहीं, शहरी एरिया में भी खाली प्लाटों पर एजेंसी ने कैसे बिल चस्पा किए होंगे, ये अपने आप में संदिग्ध है। वहीं, लोगों को समय पर बिल न मिलने से वे ब्याज में छूट का लाभ लेने का अवसर तक खो चुके हैं, जिसकी जिम्मेदारी ये कंपनी है।
उन्होंने बताया कि नगर निगम ने प्रॉपर्टी टैक्स के बिल बांटने के लिए सिम्पलेक्स एजेंसी को हॉयर किया है जबकि प्रॉपर्टी टैक्स की असेसमेंट देने का काम पहले याशी कंपनी की ओर से किया जा रहा है। इस हिसाब से एक ही काम का दो बार भुगतान किया जा रहा है। निगम क्षेत्र में करीब पौने दो लाख संपत्तियां हैं। इनमें से करीब 30 हजार खाली प्लाट हैं। अगर सिर्फ 30 हजार प्लाटों की ही बात की जाए तो 21 रुपये के हिसाब से एजेंसी को निगम बिना काम किए ही सवा छह लाख रुपये का भुगतान करने वाला है।
बिल न मिलने से लोगों को नहीं मिल पाया लाभ
शहरी स्थानीय निकाय की ओर से 31 मार्च तक बिल के ब्याज में छूट दी गई थी लेकिन शहर के लोगों को बिल ही नहीं मिले। इस कारण लोग इसे भर नहीं पाए और ब्याज की छूट के लाभ से वंचित रह गए। वहीं, शहर के अलग-अलग एरिया से बिल न मिलने की शिकायत मिली है जबकि कंपनी खाली प्लाटों को भी बिल बांटने का दावा कर रही है। अगर इस कंपनी का निगम भुगतान करना ही चाहता है तो इससे पहले पार्षदों की रिपोर्ट ले। इस रिपोर्ट के आधार पर ही एजेंसी का भुगतान करवाया जाए। -दुष्यंत भट्ट, वरिष्ठ उप महापौर, नगर निगम।