समालखा। नाटक प्रस्तुत करते हुए कलाकार
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समालखा। पाईट कॉलेज में चल रहे 11वें चलो थिएटर महोत्सव के दौरान बुधवार को स्पर्श नाट्य रंग ने ‘पति गए रे काठियावाड़’ नाटक का मंचन किया। इस नाटक ने दर्शकों को हंसा-हंसाकर लोटपोट कर दिया। इसी के साथ ही एक गंभीर संदेश दिया कि दांपत्य जीवन विश्वास की डोरी पर चलता है।
नाटक में महाराष्ट्र के पुणे के पास के गांव भांगोड़ा की कहानी है। पुणे के सूबेदार राव सालाना राजस्व वसूली के लिए लंबे समय के लिए पूणे से काठियावाड़ जाते हैं। पति के काठियावाड़ जाने की बात सुनकर पत्नी उदास हो जाती है। पति की गैर मौजूदगी में खुद को व्यस्त रखने के लिए कुछ काम करने की इच्छा जाहिर करती हैं। वह अपनी दासी महोना के साथ ही मिलकर पूणे में पति की कामकाज संभालती है। अपनी पवित्रता पर आंच नहीं आने देती, जिसका प्रतीक होता है पति की पगड़ी बांधा गया फूलों से बना तुर्रा, जो सूखता नहीं है। जो पूरे काठियावांड में चर्चा का केंद्र बना रहा था। नाटक दांपत्य जीवन पति-पत्नी के विश्वास के रिश्ते को हंसते और गुदगुदाते अंदाज में दिखाता है।
अजित चौधरी के निर्देशन में नाटक का मंचन किया गया। इसका शुभारंभ मुख्यातिथि उपायुक्त सुशील सारवान और एनआईटी कुरुक्षेत्र के डायेक्टर प्रो. रमन्ना रेडी, आयकर विभाग की कमिश्नर मोनिका सिंह, कॉलेज के चेयरमैन हरिओम तायल व वाइस चेयरमैन राकेश तायल ने दीप प्रज्ज्वलित करके किया। इससे पहले नाटक के डायरेक्टर अजित चौधरी को रास रंग सम्मान से सम्मानित किया गया। इस मौके पर डॉ. रवि मोहन, बीबी शर्मा, श्वेता तायल, रानी तायल, कांता देवी, और डायरेक्टर शक्ति कुमार, बेला भाटिया आदि मौजूद रहे।