हरियाणा के पानीपत में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने नेशनल फर्टिलाइजर लिमिटेड (एनएफएल) पर 35.84 करोड़ रुपये हर्जाना लगाया है। एनएफएल ने यहां से निकलने वाली राख का समय पर निस्तारण नहीं किया। हवा चलने पर यहां से राख उड़ती है। बरसात में पानी में मिलकर राख भूजल को खराब करती है।
इन तथ्य के साथ कौशल किशोर विश्वकर्मा नाम के व्यक्ति ने एनएफएल के खिलाफ एनजीटी में केस दायर किया था। एनजीटी ने इस केस में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से संबंधित चार अधिकारियों की एक कमेटी गठित की थी। कमेटी ने थर्मल के पास राख के डंपिंग प्वाइंट का निरीक्षण किया।
नौ सितंबर 2024 को अपीलकर्ता की अपील को गंभीरता से लिया गया और कमेटी ने अपनी रिपोर्ट एनजीटी में पेश की। 13 सितंबर को एनजीटी ने एनएफएल पर 35.84 करोड़ रुपये हर्जाना लगा दिया। इसको भरने के लिए एक माह का वक्त दिया गया है।
एनएफएल ने एनजीटी में दी अपनी दलील में कहा कि उन्होंने राख को उठाने का ठेका रोहतक की मैसर्स शटहैम सेल्स कंपनी को दिया है। फरवरी 2024 से सितंबर 2024 तक 3124.90 मीट्रिक टन कार्बन घोल उठा लिया गया है। वर्तमान में मात्रा यहां 119473.10 मीट्रिक टन कार्बन घोल है। कमेटी की रिपोर्ट में यहां 122600 मीट्रिक टन कार्बन घोल मिला।
एनजीटी के नियमानुसार यहां से यह घोल तीन माह के अंदर उठाकर इसका निस्तारण किया जाना होता है। तीन माह तक एनजीटी में इस मामले की सुनवाई चली। एनजीटी ने एनएफएल की दलीलों को अस्वीकार कर दिया।
इस मामले में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मैंबर सेक्रेटरी प्रदीप कुमार, सदस्य भूपेंद्र सिंह, एग्जीक्यूटिव इंजीनियर सतेंद्र व निर्मल सिंह की एक कमेटी गठित की गई। चार सदस्यीय कमेटी ने यहां अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की।
जिसमें एनएफएल पर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने का दोषी माना गया। एनजीटी ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को कम से कम हर्जाना तय करने के निर्देश दिए गए। कमेटी ने 35.84 करोड़ रुपये हर्जाना तय किया। अब एनएफएल को यह जमा कराना होगा। इस राशि को बेहतर पर्यावरण बनाने में इस्तेमाल किया जाएगा।