पानीपत। दीनभर चलती रही ठंडी हवा, बच्चों को कंबल में लपेटकर लेकर जाती हुई महिला व खुद शॉल ओढकर जाती
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पानीपत। दो दिन हुई हल्की बूंदाबांदी से स्मॉग की परत टूट गई है। फैक्टरियों एवं वाहनों से निकलने वाला धुआं व सड़कों खेतों से उड़ने वाली धूल के कण जमीन से ऊपर उठ गए हैं। लोगों को प्रदूषण से राहत मिली है। 25 अक्तूबर के बाद शुक्रवार को पानीपत का प्रदूषण स्तर पहली बार ग्रीन जोन में आया है। शुक्रवार को शहर का एयरक्वालिटी इंडेक्श 99 दर्ज किया गया। प्रदूषण बोर्ड के अनुसार यह स्तर संतुष्टित है। इसका स्वास्थ्य पर बुरा असर नहीं पड़ेगा। पर्यावरण मामलों में एक्सपर्ट डॉ. राजेंद्र सिंह ने बताया कि दो दिन बूंदाबांदी हुई है और हवा की रफ्तार भी 10 किलोमीटर प्रति घंटा से अधिक है। इसलिए स्मॉग की परत छट गई है। धुआं व धूल के कण ऊपर उठ गए हैं। अब उद्योगों को भी सप्ताह में दो दिन बंद रखा जा रहा है। इसलिए प्रदूषण स्तर में कमी आई है। कई दिनों तक ऐसे ही हवा चली तो प्रदूषण का स्तर और भी नीचे आ सकता है।
बढ़ते प्रदूषण के कारण उद्यमियों को हुआ 200 करोड़ का नुकसान
नवंबर व दिसंबर माह में शहर का प्रदूषण स्तर रेड जोन में रहा था। पानीपत गुरुग्राम के बाद सबसे प्रदूषित शहर रहा। इस दौरान सांस के रोगियों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ा था। एनजीटी ने एनसीआर में ग्रैप लागू कर दिया था। शहर के उद्योगों को सप्ताह में दो दिन बंद रखने व कोयला संचालित उद्योगों को नौ दिन के लिए बंद कर दिया था। ऐसे में टेक्सटाइल इंडस्ट्री को इन दो माह में 200 करोड़ तक का नुकसान उठाना पड़ा था।
शहर का बढ़ता प्रदूषण स्तर चिंता का विषय है। अब बूंदाबांदी के बाद शहर का प्रदूषण स्तर काफी गिरा है। ये संतोषजनक है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भी प्रदूषण के कारकों पर लगातार कार्रवाई कर रहा है।
कमलजीत सैनी, क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड