पानीपत। पानीपत की टेक्सटाइल नगरी को गति देने के लिए यहां के शिक्षण संस्थानों में सरकार ने टेक्सटाइल कोर्स शुरू किए हैं। इन कोर्स में दाखिला लेने के लिए छात्रों में कड़ी प्रतियोगिता भी चल रही है। अब उद्यमियों को यहीं पर बेहतरीन डिजाइनर व ट्रेंड लेबर मिलेगी। उद्यमियों को दिल्ली, मुंबई, पुणे, सूरत, जयपुर, लखनऊ और चंडीगढ़ जैसी सिटी की तरफ लेबर के लिए रुख करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। वहां से डिजाइनर हायर करने के लिए उद्यमियों को लाखों रुपये देने पड़ते हैं। अब यहीं पर छात्र टेक्सटाइल की शिक्षा ग्रहण करेंगे और उद्यमी उन्हें रोजगार देंगे। उद्यमियों ने छात्रों का टेक्सटाइल में रुझान बढ़ाने के लिए प्रदर्शनी लगानी शुरू कर दी है। हाल में एक ऐसी प्रदर्शनी आयोजित हो चुकी है।
आर्य कॉलेज में टेक्सटाइल कोर्स की 60 सीट हैं। सभी सीट भर चुकी हैं। यहां पर टेक्सटाइल कोर्स में दाखिला लेने वालों में काफी संघर्ष रहा। आईटीआई में दाखिला की प्रक्रिया चल रही है। यहां पर 20 सीट हैं। पाइट कॉलेज में 30 सीट में से 20 सीटों पर दाखिला हो चुका है।
अब स्थानीय युवा स्टोर कीपर व सुपरवाइजर की नौकरी करने तक सीमित
अब टेक्सटाइल फैक्टरियों में स्थानीय युवा स्टोर कीपर, सुपरवाइजर व कंप्यूटर ऑपरेटर की नौकरी करने तक ही सीमित हैं, क्योंकि इन युवाओं को टेक्सटाइल की जानकारी नहीं है। टेक्सटाइल उत्पादों का उत्पादन बाहर से आने वाली ट्रेंड लेबर पर ही निर्भर करता है।
कीर्तिमान रच रहा पानीपत
पानीपत धागा उत्पादन, 16 हजार करोड़ का एक्सपोर्ट और कंबल बनाने जैसे क्षेत्रों में कीर्तिमान रच रहा है। पानीपत विश्व भर के लगभग 140 देशों में अपने उत्पाद भेजता है। पानीपत की 18 हजार फैक्टरियों में पौने तीन लाख प्रवासी काम करते हैं। सरकार को हर साल टैक्स के रूप में यहां के उद्यमी 12 हजार करोड़ रुपये देते हैं। पानीपत विश्व भर में एक दिन में सबसे अधिक रंगीन धागा उत्पादन करने वाली नगरी है। पानीपत ने ये मुकाम इटली को पछाड़कर हासिल किया है।
अब स्थानीय युवाओं को मिलेगा रोजगार : मनीष
उनकी ये काफी पुरानी मांग थी कि आईटीआई व कॉलेज में टेक्सटाइल कोर्स शुरू किए जाएं। ये मांग पूरी हुई है। यहीं पर पढ़ाई कर और प्रशिक्षण लेकर युवा टेक्सटाइल क्षेत्र में अपना भविष्य बना सकते हैं।
-मनीष अग्रवाल, सचिव चैंबर ऑफ कॉमर्स
आर्य कॉलेज में छह साल से टेक्सटाइल के कोर्स चल रहे हैं। इस बार छात्रों में टेक्सटाइल के प्रति अधिक जागृति आई है। इस बार सभी 60 सीटें भर गई हैं। छात्र ये कोर्स करके टेक्सटाइल क्षेत्र में अपना भविष्य बना सकते हैं।
-डॉ. जगदीश गुप्ता, प्राचार्य आर्य कॉलेज।