नए साल में रेडीमेड कपड़ा महंगा होने जा रहा है। कारण, सरकार हजार रुपये के नीचे के रेडीमेड आइटमों पर जीएसटी की दर पांच प्रतिशत से बढ़ाकर 12 फीसद करने जा रही है। इस प्रकार सात प्रतिशत दाम बढ़ने का सीधा असर आम आदमी और दुकानदारों पर पड़ेगा। दुकानदारों का कहना है कि अभी तक वे कोरोना की वजह से आई आर्थिक मंदी की मार से उबर नहीं पाए हैं कि अब दोबारा फिर से जीएसटी की मार उन पर भारी पड़ने वाली है। इससे ग्राहक भी परेशान होंगे।
उनका कहना है कि जो माल उन्होंने पहले 5 प्रतिशत जीएसटी के हिसाब से खरीदा था उस पर 12 प्रतिशत की जीएसटी कैसे दिखाई जा सकती है। इससे सीधा 7 प्रतिशत का नुकसान होगा। वहीं, हजार रुपये से नीचे के आइटम ज्यादातर मध्यम व निम्न वर्ग ही खरीदता है इसलिए ये भी महंगाई से प्रभावित होंगे।
7 प्रतिशत का सीधा नुकसान
पहले 5 प्रतिशत जीएसटी था अब 12 प्रतिशत हो जाएगा। जो माल हमने 5 प्रतिशत के हिसाब से खरीदा था उसका 12 प्रतिशत जीएसटी के साथ कैसे बिल बनाया जाएगा। इससे 7 प्रतिशत का सीधा लॉस दुकानदारों को होगा। इससे मंहगाई भी बढ़ेगी और आम आदमी की जेब पर और खर्च भी बढे़गा। -राजू मेहंदीरता
आम आदमी की बढे़गी परेशानी
आम आदमी की जरूरत रोटी कपड़ा और मकान की है। रोटी कमानी पहले ही मुश्किल हो रही है, मकान बनाना उससे भी मुश्किल और कपड़ा खरीदना भी मुश्किल होगा। इससे महंगाई काफी बढ़ जाएगी। दुकानदारों के साथ आम आदमी के ग्राहकों पर भी इसका सीधा असर पड़ेगा। -देव गर्ग
परेशान दुकानदारों पर मंदी की मार
कोरोना से लेकर अब तक दुकानदार परेशान चल रहे हैं। आर्थिक मंदी ने सबको चपेट में ले लिया है। बाजार खाली हैं, ऊपर से जीएसटी बढ़ाने से महंगाई बढ़ना तो तय है। इसका दुष्प्रभाव दुकानदारों पर पड़ने वाला है। ग्राहक भी इससे अछूते नहीं रहेंगे। -जय मेहता
ब्याज देने तक ही रह जाएंगे दुकानदार
पहले ही कोरोना की वजह से दुकानदार परेशान थे अब जीएसटी बढ़ने से और ज्यादा परेशान होंगे। महंगाई बढ़ने से दुकानदारी पर सीधा असर पड़ेगा। इनकम होगी नहीं और ब्याज बढ़ता जाएगा। पहले ही दुकानदारों से बैंकों का ब्याज नहीं सहन हो रहा। आगे से माल लेने पर पेमेंट महीने में नहीं की तो वे भी ब्याज लगा देते हैं। -इंद्रजीत कथूरिया