पानीपत। शहर से महज साढ़े तीन किलोमीटर दूर बसा काबड़ी गांव 20 साल पहले निर्मल गांव बना था। उस वक्त आसपास के क्षेत्र में इसी गांव के पास ये उपलब्धि थी। शहर के बहुत करीब होने के कारण इस गांव में विकास की अपार संभावनाएं हैं, लेकिन जन प्रतिनिधियों पर अक्सर गांव की अनदेखी करने के आरोप लगते रहे हैं। लोगों का कहना है कि गांव के जन प्रतिनिधि गांव का विकास करने के लिए नहीं बल्कि चौधर के लिए चुनाव लड़ते हैं। चुनाव जीतते ही लोगों की समस्याओं को भूल जाते हैं। गांव में आज भी गंदगी और गलियां सबसे बड़ी समस्या हैं। गांव की गलियां उबड़-खाबड़ हैं। गांव में प्रवेश करते ही गंदगी के ढेर व सड़कों पर गंदा पानी भरा मिलता है। लोग मूलभूत समस्याओं से जूझ रहे हैं। साढ़े चार हजार मतदाताओं वाले काबड़ी गांव में वर्षों से जल निकासी की समस्या है। लोगों का कहना है कि जो भी प्रतिनिधि चुना गया, उसने स्वच्छता की ओर ध्यान नहीं दिया। उन्हें ऐसा जन प्रतिनिधि चाहिए जो गांव के मुद्दों को प्राथमिकता से हल करे। स्वच्छता पर जिसका फोकस हो।
काबड़ी गांव से धारा सिंह रावल पानीपत ग्रामीण से आजाद उम्मीदवार के तौर पर विधायक का चुनाव लड़ चुके हैं। वह अब भाजपा में हैं और टिकट के दावेदार भी हैं। अन्य लोग भी धरातल बना रहे हैं। बावजूद इसके गांव का विकास नहीं हुआ। गांव के विकास के लिए प्रशासन पर दबाव बनाने में कोई कामयाब नहीं हो सका।