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कबड्डी की टीम टूटने के बाद वॉलीबाल खेलना किया शुरू, खेलो इंडिया में दिखाएंगी प्रतिभा

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पानीपत। संसाधनों की कमी के बाद भी पानीपत की चार बेटियां खेल में मैदान मार रही हैं। गांव में समुचित ग्राउंड मिला न उपकरण फिर भी प्रतिभा के बूते अपना और जिले का नाम अंतरराष्ट्रीय फलक पर टांक दिया। पहले कबड्डी में जोर आजमाइश की लेकिन टीम टूट गई तो वॉलीबॉल में हाथ आजमाया। प्रतिभा के बूते अब वॉलीबॉल में खेलो इंडिया और एशियन चैंपियनशिप में दम दिखाने को तैयार हैं। उन्हें बेटी होने पर फख्र है। दिल में देश का परचम पूरी दुनिया में फहराने की ललक भी है।
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स्कूल के समय शिवानी, तनु, अनु और कीर्ति कबड्डी खेलती थीं लेकिन फिर टीम टूट गई। इस पर कोच बिजेंद्र ने चारों को वॉलीबॉल सिखाना शुरू किया। इन बेटियों के गांव जलालपुर प्रथम में न वॉलीबॉल ग्राउंड है न ही उपकरण, फिर भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलकर देश और राज्य का नाम रोशन कर रहीं हैं। इनमें से दो खिलाड़ी पंचकूला में खेलो इंडिया यूथ गेम्स के कैंप और दो एशियन चैंपियनशिप कैंप में तैयारी कर रही हैं।
गांव जलालपुर प्रथम निवासी वॉलीबॉल खिलाड़ी शिवानी रावल पिछले सात साल से वॉलीबॉल खेल रही हैं। पिता बिजेंद्र रावल उनके कोच भी हैं। वह अपनी बेटी के साथ गांव की बेटियों को भी अलग-अलग खेलों का अभ्यास कराते हैं। इस वक्त शिवानी खेलो इंडिया यूथ गेम्स पंचकूला कैंप में तैयारी कर रही हैं। अंडर-14 खेलो इंडिया में स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं और चार नेशनल प्रतियोगिताओं का हिस्सा रही हैं।
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जलालपुर प्रथम की ही रहने वाली कीर्ति भी अंडर-14 खेलो इंडिया में स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं। सब जूनियर में कांस्य पदक जीत चुकी हैं। कीर्ति के पिता मजदूरी करते हैं। दिनरात अभ्यास के बाद कीर्ति ने एशिया कैंप के लिए ट्रायल राउंड पार किया और अब वह एशिया कैंप अंडर-20 के लिए भुवनेश्वर में अभ्यास कर रही हैं। साथ ही उनका खेलो इंडिया का भी अभ्यास चल रहा है। उनके कोच भी बिजेंद्र रावल ही हैं।
उत्तर प्रदेश की रहने वाली तनु पानीपत में ही रहकर अभ्यास करती हैं। जलालपुर प्रथम के नवज्योति स्कूल में पढ़ने के दौरान खेलना शुरू किया था। पहले कबड्डी से शुरुआत की और अब वॉलीबॉल की खिलाड़ी हैं। कोच बिजेंद्र रावल ने अभ्यास करवाना शुरू करवाया। अब तक छह नेशनल प्रतियोगिताएं खेल चुकी हैं। अंडर-18 एशिया के लिए चयन हो चुका है। भुवनेश्वर कैंप में अभ्यास कर रही हैं। खेलो इंडिया प्रतियोगिता के दिन पंचकूला जाएंगी।
जलालपुर की रहने वाली अनु पिछले चार साल से वॉलीबॉल खेल रही है। स्कूली अंडर-14 में मेडल जीत चुकी है। अनू के पिता सतपाल का सपना है कि बेटी अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी बने और देश का नाम रोशन करे। गांव में ही खेलना शुरू किया था। पहले तकनीक अच्छी नहीं थी लेकिन मेहनत कर उसे बेहतर किया। पंचकूला खेलो इंडिया कैंप में अभ्यास कर रही हैं। वहां के कोच के अनुसार डाइट और तकनीक का पालन कर रही हैं।
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