नगर निगम ने प्रॉपर्टी की खरीद फरोख्त के लिए एनओसी की अनिवार्यता को समाप्त कर भले ही शहर की जनता को राहत दी।
लेकिन निगम के इस फैसले के साथ ही उपभोक्ताओं से बकाया प्रॉपर्टी टैक्स की रिकवरी की संभावनाएं भी कम हो गई हैं। इससे निगम का मिशन 30 करोड़ फेल होता नजर आ रहा है।
नगर निगम निगम ने 23 जून 2015 से शहर में मकान, दुकान और प्लॉट संपत्ति की रजिस्ट्री के लिए एनओसी की अनिवार्यता को समाप्त कर दिया है।
प्रॉपर्टी की खरीद फरोख्त के लिए एनओसी (नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट) की अनिवार्यता समाप्त होने से निगम को रजिस्ट्री के समय मिलने वाला बकाया हाउस टैक्स और डेवलपमेंट चार्ज मिलने की संभावनाएं भी कम हो गई हैं। मौजूदा समय में शहर की करीब ढाई लाख प्रॉपर्टी पर वर्ष 2014 तक निगम का करीब 30 करोड़ रुपये का हाउस टैक्स बकाया है। जो उपभोक्ताओं को प्रॉपर्टी की एनओसी लेने से पहले जमा कराना होता था
अब तक उपभोक्ताओं को शहर में कोई भी प्रॉपर्टी की खरीद फरोख्त करने के लिए रजिस्ट्री के समय निगम से एनडीसी (नो ड्यूज सर्टिफिकेट) लेकर तहसील कार्यालय में जमा कराना होता था।
ऐसे में निगम की ओर से एनओसी जारी करने से पहले ही उपभोक्ता से प्रॉपर्टी पर बकाया हाउस टैक्स और डेवलपमेंट चार्ज जमा कराया जाता था। लेकिन एनओसी की अनिवार्यता समाप्त होने के बाद निगम को अब टैक्स को रिकवर करना मुश्किल हो गया है।
इससे निगम का उपभोक्ताओं से बकाया 30 करोड़ की रिकवरी की योजना, मिशन 30 करोड़ पर भी फेल होता नजर आ रहा है और भविष्य में भी हाउस टैक्स चोरी की बढ़ने की संभावनाएं अधिक हैं।
अब तक स्वार्थ की राजनीति, वैध और अवैध कॉलोनियों में फेर हाउस टैक्स का मामला उलझा रहा। निगम ने जब भी उपभोक्ताओं से हाउस टैक्स जमा करवाने की बात कही तो उपभोक्ताओं ने पहले कॉलोनियों में सुविधाएं देने और कॉलोनियों को वैध कराने की मांग रखी।
पार्षद और विधायक भी लोगों के पक्ष में ही अपना समर्थन देते रहे। इससे निगम करोड़ों रुपये के हाउस टैक्स की रिकवरी नहीं कर सका। अब निगम एनओसी की अनिवार्यता को समाप्त करने के बाद बकाया टैक्स मिलने की संभावनाएं लगभग समाप्त हो गई हैं।
एनओसी की अनिवार्यता समाप्त होने का सबसे ज्यादा फायदा प्रॉपर्टी बेचने वाले को होगा। एनओसी के बिना प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री होने के कारण विक्रेता बड़ी सहजता से इस टैक्स की अदायगी से बच जाएंगे। लेकिन बाद में खरीददार को ही बरसों का टैक्स और डेवलपमेंट चार्ज जमा करवाना होगा।
एनओसी की अनिवार्यता समाप्त होने से उपभोक्ताओं को मकान, दुकान और प्लॉट खरीदने में कोई परेशानी नहीं होगी। निगम टैक्स की रिकवरी के लिए विशेष टीमों का गठन करेगा। इससे निगम की आमदनी भी प्रभावित नहीं होगी। नक्शा पास करने से पहले भी निगम की ओर से हाउस टैक्स और डेवलपमेंट चार्ज की एनडीसी देखी जाएगी।
शिव प्रसाद शर्मा निगमायुक्त