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पुरुष खिलाड़ियों के जैवलिन का वजन 800 ग्राम और लंबाई 2.60 मीटर से 2.70 मीटर तक होती है

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प्राचीन ओलंपिक खेलों में जैवलिन में 708 ईसा पूर्व में हिस्सा बनाया गया। इसके दो मुकाबले होते थे, पहला दूरी पर फेंकने का और दूसरा निशाने पर मारने का। 18वीं शताब्दी में एथेंस, जर्मनी, स्वीडन और फिनलैंड से होता हुआ आजा का आधुनिक एथलीट खेल बन गया। वर्ष 1906 में इसे ओलंपिक खेलों का हिस्सा बनाया गया। जैवलिन के इस इतिहास के साथ शनिवार को एक और नाम नीरज चोपड़ा का भी जुड़ गया। आइए आपको जैवलिन और इसके खेल से मिलवाते हैं।
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जेवलिन जिसे भाला भी कहते हैं, इसके तीन भाग होते हैं। पहला भाग टिप, दूसरा शॉफ्ट और तीसरी शॉफ्ट को पकड़ने के लिए उस पर लपेटी गई डोर। शॉफ्ट के जरिए खिलाड़ी जैवलिन को पकड़ता है और इसे फेंकने पर टिप जमीन में जाकर गड़ जाती है। पुरुषों के जैवलिन की लंबाई 2.60 से 2.70 मीटर और वजन 800 ग्राम होता है जबकि महिला खिलाड़ियों के लिए लंबाई 2.20 से 2.30 मीटर और वजन 600 ग्राम होता है।
जैवलिन कोच जितेंद्र जागलान ने बताया कि खिलाड़ी जैवलिन को उसके शॉफ्ट पर लगी डोर की ग्रिप से पकड़ता है। इसे कंधे से ऊपर लेकर 30 मीटर के रनवे पर दौड़ता है। इस रनवे की चौड़ाई चार मीटर होती है। रनवे के अंत में एक रेखा होती है। जिससे बाहर पैर पड़ने पर खिलाड़ी के प्रयास को नहीं माना जाता है। साथ ही जब तक जैवलिन हवा में रहता है, खिलाड़ी उसकी ओर पीठ नहीं कर सकता, न ही रनवे से जा सकता है। जैवलिन को 29 डिग्री पर बने आर्क सेक्टर (जहां पर जैवलिन जमीन पर घुस जाता है) में फेंका जाता है, जिसके दोनों ओर सात मीटर की एक और रेखा होती है। जैवलिन उससे बाहर जाने पर खिलाड़ी के प्रयास को मान्य नहीं माना जाता है। हर खिलाड़ी को छह प्रयास दिए जाते हैं। सर्वश्रेष्ठ प्रयास को ही स्कोर के तौर पर गिना जाता है। साथ ही अगर जैवलिन जमीन में घुसता है तो भी खिलाड़ी के प्रयास को नहीं गिना जाता।
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