लॉकडाउन में पिछले एक माह से देशभर के उद्योग बंद रहने से यमुना नदी का पानी साफ-सुथरा तो हो ही गया है। इसकी गुणवत्ता भी बढ़ गई है। अब इसके पानी में जलीय जीवों जीवित रह सकते हैं। एक लंबे अरसे के बाद यमुना के स्वच्छ हुए पानी को लेकर शनिवार को अमर उजाला टीम ने अपने फेसबुक पेज के माध्यम से भी इसकी लाइव कवरेज की। वहीं यमुना किनारे केंद्रीय यमुना जल आयोग के जेई लोकेंद्र कुमार से भी बातचीत की।
जेई ने बताया कि यमुना का ऐसा पानी एक लंबे अरस के बाद साफ हुआ है। अब तक यमुना के पानी में सभी प्रकार के केमिकल व वेस्ट मैटेरियल को फेंक दिया जाता रहा है, जिससे इसका प्रदूषण स्तर काफी बढ़ गया था, लेकिन अब इसके पानी को कई मापदंडों में जांचा गया तो इसकी गुणवत्ता ठीक पाई गई है। उत्तराखंड राज्य के उत्तरकाशी जिले में यमनोत्री जगह पर बंदरपूंछ नामक जगह से यमुना निकलती है, जो उत्तराखंड के बाद हरियाणा, दिल्ली से होते हुए उत्तर प्रदेश के प्रयाग राज में जाकर गंगा से मिल जाती है। इसकी लंबाई करीब 1375 किलोमीटर की है, जो कई शहरों से होकर गुजरती है। इसके किनारे पर दिल्ली, आगरा जैसे कई बड़े शहर भी लगते हैं।
डिजॉल्व ऑक्सीजन बढ़ी, टीडीएस भी हुआ काम
जेई लोकेंद्र कुमार ने बताया कि पीने योग्य पानी की जांच करने के लिए बहुत सारे मापदंड होते हैं। इनमें से कुछ का जिक्र करते हुुए उन्होंने कहा कि इस समय यमुना के पानी की पीएच वैल्यू 6.5 से लेकर 8.5 तक होनी चाहिए। इस समय यमुना के पानी की पीएच वैल्यू इस समय 6.5 है, जो अच्छी है। उन्होंने बताया कि इसमें डिजॉल्व ऑक्सीजन का स्तर 4 एमजी प्रति लीटर होना चाहिए जो इस समय 7.8 है। इसका मतलब है इस पानी में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ रही है, जो जलीय जीवों के लिए लाभदायक है। उन्होंने बताया कि पीने योग्य पानी का टीडीएस 500 से 2000 तक होता है। इससे ज्यादा को पीने योग्य नहीं माना जा सकता। जबकि इस समय यमुना क पानी का टीडीएस स्तर केवल 221 है, जो एक अच्छी बात है।
50-60 साल बाद देखा इतना साफ पानी
यमुना के पानी की स्वच्छता को लेकर आस-पास के गांव के लोगों से बातचीत की गई तो उन्होंने बताया कि यमुना का इतना साफ पानी उन्होंने 50-60 साल पहले देखा था। एक लंबे अरसे से यमुना में केमिकल, सीवर व अन्य प्रकार के वेस्ट को बहाते देख रहे हैं। लेकिन लॉकडाउन के चलते सब उद्योग बंद हैं, लोग भी यमुना पर नहीं आ रहे हैं, यही कारण है कि यमुना अब साफ-सुथरी व स्वच्छ है, जो खेती के लिए भी लाभदायक है।