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मेरा-मेरी का त्याग कर जीवन यापन करें : मुनि

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समालखा। जैन स्थानक में चातुर्मास में उपेंद्र मुनि ने प्रवचन दिए। प्रवचन सुनने के लिए आसपास के क्षेत्रों से भी श्रावक पहुंचे। मुनि ने कहा कि मनुष्य हर वस्तु को मेरी मेरी करता है परंतु मनुष्य यह नहीं सोचता की मृत्यु के महा मार्ग पर तुझे अकेला ही चलना होगा। यहां कोई स्थाई नहीं है।
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कोई वस्तु उसकी स्थाई नहीं है। संसार में विदाई के वक्त मनुष्य की जुबान पर यह गीत होता है। अकेला आए अकेला जाए फिर भी इंसान मेरा मेरी करता रहता है। जब तुम्हारे जाने की बारी आएगी तब तुम जिस प्राण प्यारी पत्नी पर गर्व करते हो वह भी मृत्यु के समय विलाप करती हुई एक कोने में बैठी रहेगी और स्नेह रखने वाली मां भी दरवाजे तक छोड़ने आएगी। परिजन, मित्र केवल श्मशान तक ही साथ जाएंगे।
अगला सफर अकेले ही तय करना है। इसलिए इंसान को मेरा मेरी न करते हुए दान पुण्य धार्मिक कर्म करते हुए सादगी में अपना जीवन यापन करना चाहिए। प्रवचनों में एसएस जैन सभा के प्रधान वीर प्रकाश जैन, अश्विनी जैन, पवन जैन, संजय जैन, प्रमोद जैन, धर्मपाल, शिवकुमार, अशोक वकील जैन, त्रिलोक जैन आदि रहे।
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अरुण मुनि ने प्रवचन के माध्यम से दिया आत्म सुधार का संदेश : अग्रवाल मंडी जैन स्थानक में अरुण मुनि महाराज ने प्रवचन के माध्यम से आत्म सुधार का संदेश दिया। महाराज ने कहा कि हर कोई जीवन की यात्रा में कभी न कभी कोई भूल करता है लेकिन जो अपनी भूल को स्वीकार कर ले वही सच्चा साधक बनता है। प्रतिक्रमण, आत्मावलोकन और आत्म सुधार ही जैन धर्म की आत्मा हैं। भजन न केवल भक्ति का भाव जगाते हैं बल्कि जीवन के प्रति जागरूकता भी उत्पन्न करते हैं।
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प्रभु की करुणा हमें यह अवसर देती है। सुधार की पहल हमें करनी होती है। आत्म सुधार से ही साधक बन सकते हैं। इसलिए सबसे पहले आत्म सुधार करना जरूरी है।
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