सन-1761 में पानीपत की तीसरी लड़ाई में शहीद हुए मराठों की याद में काला आम्ब पर शनिवार को मकर संक्राति के अवसर पर 262 वां शौर्य दिवस मनाया गया। इस दौरान महाराष्ट्र सरकार के शिक्षामंत्री के साथ महाराष्ट्र से सैकड़ों लोग कार्यक्रम में पहुंचे, हालांकि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे कार्यक्रम में नहीं पहुंच सके। बतौर मुख्यातिथि राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने शिरकत की। वहीं अति विशिष्ट अतिथि के तौर पर शामिल उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने काला आम्ब में जल्द स्मारक स्थल का पुनरुद्धार कर इसे पर्यटन हब के रूप में विकसित किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि वीर मराठों के बलिदान को कभी नही भुलाया जा सकता। आने वाली पीढ़ियों को भी ऐसे युद्धों से प्रेरणा लेनी चाहिए। उन्हें बताया जाना चाहिए कि भारत कैसे अखंड और मजबूत बना। हमारे वीरों ने किस तरह से कुर्बानियां देकर इसकी अखंडता को बरकरार रखा।
दुष्यंत चौटाला ने कहा कि प्रदेश सरकार काला आम्ब में जल्द स्मारक स्थल का निर्माण करेगी और पर्यटन हब के साथ-साथ इसके ऐतिहासिक महत्व का भी ध्यान रखा जाएगा। भारतीय पुरातत्व विभाग से अनुमति लेकर यहां पर स्मारक स्थल से संबंधित अन्य विकास कार्य भी किए जाएंगे।
अगर जरूरत पड़ी तो ई-भूमि के माध्यम से साथ लगती भूमि भी इसमें शामिल की जाएगी। इस दौरान महाराष्ट्र और हरियाणा से कार्यक्रम में भाग लेने आए मराठा समाज के लोगों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम भी पेश किए। इसके अलावा पानीपत की तीसरी लड़ाई में शहीद हुए मराठा योद्धाओं के बारे में जानकारी दी।
कार्यक्रम में भाग लेने के लिए करीब 1500 लोग महाराष्ट्र से पहुंचे। कुछ लोग पुणे से घोड़े पर भी आए। सभी ने काला आम्ब की धरती को नमन किया। इससे पहले शौर्य स्मारक समिति के अध्यक्ष प्रदीप पाटिल ने समिति की ओर से राज्यपाल, उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला समेत उपस्थित लोगों का स्वागत करते हुए उन्हें छत्रपति शिवाजी का चित्र भेंट किया।
साथ ही अतिथियों ने स्मारक पर जाकर मशाल जलाई और पानीपत के तीसरे युद्ध में हजारों की संख्या में वीरगति को प्राप्त हुए सैनिकों को पुष्पांजलि अर्पित की। इस मौके पर लोकसभा सांसद संजय भाटिया, राज्यसभा सांसद कृष्णलाल पंवार, विधायक महिपाल ढांडा, विधायक हरविंद्र कल्याण, पशुपालन विभाग के चेयरमैन धर्मबीर मिर्जापुर, जजपा नेता देवेंद्र कादियान, जजपा जिला अध्यक्ष सुरेश काला और योद्धा स्मारक समिति के सचिव राजेश कुमार सहित सैकड़ों की संख्या में महाराष्ट्र और हरियाणा से मराठा समाज के लोग उपस्थित रहे।
पानीपत की तीनों लड़ाई मराठों की वीरता का बताती है इतिहास : राज्यपाल
राज्यपाल बंडारु दत्तात्रेय ने कहा कि पानीपत की धरती मराठों के अनुपम, धैर्य, पराक्रम और शौर्य की कहानी है। उन्होंने पानीपत के युद्ध में बलिदान देने वाले सदाशिव राव भाऊ, शमशेर बहादुर, विश्वास राव और जानकोजी सिंधिया के नामों और शौर्य का उल्लेख करते हुए कहा कि मराठे सच्चे देशभक्त थे। मराठी माणुस योद्घाओं की वीरता के गीत आज भी गाए जाते हैं। पानीपत के युद्धों की कहानी बताती है कि मराठों ने देश की सीमाओं की रक्षा के लिए किस प्रकार अपनी जान की बाजी लगा दी।
हरियाणा और महाराष्ट्र के रिश्ते आगे लेकर जाएंगे : शिक्षा मंत्री
महाराष्ट्र के शिक्षामंत्री दीपक केसरकर ने कहा कि वे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के प्रतिनिधि के तौर पर यहां आए हैं, जो बलिदान मराठा और पेशवा ने यहां दिया, पूरा भारत इसका ऋणी रहेगा। उन्होंने कहा कि हरियाणा और महाराष्ट्र के रिश्ते को आगे ले जाया जाएगा। दूसरी ओर विश्व हिंदू परिषद के संगठन मंत्री विनायक देश पांडेय ने पानीपत की तीनों ऐतिहासिक लड़ाई का जिक्र करते हुए सभी को इतिहास से रूबरू करवाया और मराठों के शौर्य से अवगत करवाया।