पानीपत। मालभाड़े में बढ़ोतरी और इंडोनेशिया में हुई भीषण बारिश से कोयले के दाम दो गुने हो गए हैं। सात रुपये किलोग्राम मिलने वाला कोयला 14 रुपये प्रति किलोग्राम मिल रहा है। कोयले के बढ़े दाम का असर केमिकल, कपड़े, कंबल, लेटेक्स और धागे की कीमतों पर पड़ा है। 15 दिन में ही धागे का रेट 25 रुपये प्रति किलोग्राम बढ़ गया है। ऐसे में पानीपत की कई डाइंग इकाइयां बंद होने के कगार पर आ गई है। कपड़ा तैयार करने की कीमत दो गुना से अधिक बढ़ गई है। कई ग्राहकों ने अपने ऑर्डर कैंसल कर दिए हैं।
पानीपत की 550 डाइंग यूनिट में हर रोज 1375 टन कोयले की खपत होती है। ये कोयला इंडोनेशिया से अडानी ग्रुप खरीदता है। यह वहां से पानीपत पहुंचता है। पानीपत में डाइंग मार्केट छह हजार करोड़ रुपये की है। सोनीपत, करनाल, यूपी, जींद, असंध व कुरुक्षेत्र से यहां धागा और कपड़ा रंगाई के लिए आता है। अब कोयले का रेट 14 हजार रुपये प्रति टन हो चुका है इसलिए पानीपत के धागे का रेट 110 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर 125 रुपये प्रति किलोग्राम हो गया है।
टेस्टिंग एसिड 40 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 140 रुपये प्रति लीटर हो गया है। इस केमिकल का प्रयोग कपड़ा रंगाई में होता है। कारपेट में इस्तेमाल होने वाले लेटेक्स का रेट 70 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 140 रुपये प्रति लीटर हो गया है इसलिए कारपेट का रेट में डेढ़ गुना तक बढ़ गया है। उद्यमियों के अनुसार कोयले पर जिन वस्तुओं का उत्पादन निर्भर था, उनके रेट बढ़ गए हैं।
खरीदारों ने माल लेने से किया इंकार
कोयले के रेट बढ़ने से बेडशीट, कंबल, धागे, कपड़े और केमिकल के रेट बढ़ गए हैं इसलिए खरीदारों ने ऑर्डर कैंसल कर दिए हैं। खरीदार माल के लिए दूसरी मार्केट खंगाल रहे हैं। अब धागा 125 रुपये प्रति किलोग्राम हो गया है तो खरीदार को भय है कि अगर वह इस रेट में धागा खरीद लेगा तो आने वाले समय में धागे के रेट गिर सकते हैं। उसने व्यापार से अपने हाथ खींच लिए हैं।
इनपुट कॉस्ट बहुत बढ़ गई है
उत्पादों की इनपुट कॉस्ट बहुत अधिक बढ़ गई है। थ्री डी चादर नहीं बिक रही है। खरीदार पीछे हट रहा है। कंबल व धागे के रेट बढ़ गए हैं। धागे के रेट आगे और भी बढ़ सकते हैं। अब व्यापार करना बहुत मुश्किल हो रहा है। -प्रीतम सचदेवा, अध्यक्ष पानीपत इंडस्ट्रियल एसोसिएशन
एकदम आए उछाल से हर कोई परेशान
कोयले का रेट दोगुना हो गया है। इंडोनेशिया से कोयला आता है। भारत का कोयला बॉयलर में इस्तेमाल नहीं होता। अब बॉयलर चलाना महंगा हुआ तो इससे जुड़ा हर उत्पाद महंगा हो गया है। एक दम आए इस उछाल से हर कोई परेशान है। - संजीव अरोड़ा, डायर्स, सेक्टर 29 पार्ट टू
कई डाइंग यूनिट बंद होने की कगार पर हैं
कोयले के दाम बढ़ने से रंगाई बहुत महंगी हो गई है। कोयला खरीदना बहुत मुश्किल हो रहा है। अब ऑर्डर मिलना भी मुश्किल हो गया है। कई डाइंग यूनिट बंद होने की कगार पर पहुंच गई है। सभी डाइंग यूनिट में कोयले का ही प्रयोग होता है। इस मामले में सरकार को हस्तक्षेप करना चाहिए। - भीम राणा, प्रधान डायर्स एसोसिएशन