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अब संपत्ति की श्रेणी बदलना नामुमकिन

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पानीपत। 11 अगस्त को अमर उजाला में प्रकाशित खबर। - फोटो : Panipat
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पानीपत। अब नगर निगम अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए किसी भी प्रॉपर्टी आईडी की श्रेणी बदलना नामुमकिन होगा। इसके लिए उच्च अधिकारियों ने तीन स्तरीय कमेटी बनाई है। इसके तहत पहले संबंधित प्रॉपर्टी की मौके पर जाकर तस्दीक होगी। इसके बाद अनुभाग विभाग और फिर अंत में ऑडिट विभाग संपित्त कर का आकलन करेगा। इस रिपोर्ट के अंदर संबंधित प्रॉपर्टी का पिछले 15 साल का पूरा ब्योरा अंकित किया जाएगा। जिससे पता चल सके कि पहले संपत्ति किस प्रयोग में आ रही थी और श्रेणी में बदलाव के बाद संपत्ति का क्या प्रयोग होगा। संपत्ति की अंदर एवं बाहर की फोटो लगेगी, ताकि प्रॉपर्टी का अवलोकन बेहतर ढंग से किया जा सके।
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इसके साथ ही नगर निगम के अधीन करीब सवा दो लाख संपत्तियों में से सबसे पहले श्रेणी बदलवाने वाली संपत्तियों को रडार पर लिया जाएगा। इनमें भी कमेटी प्राथमिकता उनको देगी, जिनकी श्रेणी बदलने से पहले और बाद कर में हुए संशोधन का अंतर 50 हजार रुपये या इससे ज्यादा हो। वहीं, प्रॉपर्टी आईडी में 20 प्रतिशत क्षेत्रफल के बढ़ाने और घटाने पर कमेटी प्रमुखता से काम करेगी।
अहम बात ये है कि ये नियम तुरंत प्रभाव से लागू किए गए हैं। ये नियम भविष्य में आने वाले संपत्ति श्रेणी के आवेदनों पर तो लागू होंगे ही, इस वक्त जो आवेदन लंबित पड़े है, उन पर भी यह नियम लागू कर दिए गए हैं। गौरतलब है कि कर शाखा में श्रेणी बदलकर हो रहे गोलमाल के मामलों को उजाला ने प्रमुखता से उठाया था।
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इन पर रहेगी पड़ताल की जिम्मेदारी
संपत्तियों की श्रेणी बदलने की जिम्मेदारी संबंधित वार्ड क्लर्क, कर अधीक्षक और जेई को दी गई है। इन तीनों कर्मियों की कमेटी मौके पर जाकर रिपोर्ट लेगी। ये अपनी रिपोर्ट अनुभाग अधिकारी को देंगे। वार्ड नंबर 1 से 12 तक के अनुभाग अधिकारी कुलदीप राणा और वार्ड नंबर 13 से 26 तक के अनुभाग अधिकारी सुरेंद्र संबंधित संपत्ति की पूरी तहकीकात कर रिपोर्ट पोस्ट ऑडिट विभाग में डिप्टी डॉयरेक्टर को भेजेंगे। ऑडिट की रिपोर्ट के बाद ही श्रेणी बदलाव किया जा सकेगा।
करोड़ों का हो रहा था नुकसान इसलिए बनाए नियम
नगर निगम में पहले भी श्रेणी बदलकर करीब सवा तीन करोड़ का संपत्ति कर कम किया जा चुका है। जिसकी जांच खुद तत्कालीन संयुक्त आयुक्त ने की थी। इसके बाद कई बार मेयर ने भी लाखों रुपये का गोलमाल पकड़ा, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। हाल ही में निगम ने एक शोरूम का साढ़े 31 लाख का कर श्रेणी बदलकर महज सवा लाख रुपये कर दिया। जिसका बाद निगम जागा और ये सख्त नियम बनाए।
बनाई कमेटी करेगी रिपोर्ट
श्रेणी बदलकर संपत्ति कर कम करवाने के मामले में निगम कर्मचारियों व अधिकारियों की कमेटी बनाई गई है। जो मौके की रिपोर्ट भी करेगी और पूूरा ब्योरा भी जुटाएगी। ताकि किसी भी कर के संशोधन में निगम को वित्तीय हानि न हो। ये नियम तुंरत प्रभाव से लागू किए गए हैं। - आरके सिंह, आयुक्त, नगर निगम, पानीपत।

पानीपत। 12 नवंबर को अमर उजाला में प्रकाशित खबर।- फोटो : Panipat

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