स्टेडियम के गेट पर लगा नाम का बोर्ड।
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पानीपत। जिले में एकमात्र स्टेडियम के सामने भी गुजर जाने पर उसका पता नहीं चलता था। स्टेडियम के गेट के ऊपर उसके नाम का बोर्ड लगवाने की 50 वर्ष से किसी ने सुध ही नहीं ली थी। अब उसे अपना नाम शिवाजी स्टेडियम मिल गया है। ये सुध भी तब आई, जब पानीपत में गुजरात से सर्वे करने आई टीम स्टेडियम के चारों ओर चक्कर काटती रही, लेकिन उसे खोज नहीं पाई। ऐसा ही कुछ नवनियुक्त जिला खेल अधिकारी के साथ भी हुआ, उन्हें भी स्टेडियम नहीं मिला। हालांकि अब इस समस्या को समझा गया और अब फ्लैक्स बोर्ड लगाया गया है।
नीरज चोपड़ा की जीत के बाद सर्वे करने आई टीम को नहीं मिला था स्टेडियम
नीरज चोपड़ा की जीत के बाद गुजरात से टीम सर्वे करने आई टीम को स्टेडियम नहीं मिला था। टीम को जानना था कि नीरज चोपड़ा की जीत की वजह क्या रहीं, जिसे वे अपने राज्य में लागू कर सकें। पानीपत आने के बाद टीम गूगल मैप पर सर्च करने के बाद भी स्टेडियम के आसपास घूमती रही। स्टेडियम गेट पर नाम न लिखा होने के कारण टीम सामने से ही गुजर जाती थी।
नए जिला खेल अधिकारी को भी नहीं मिला था जल्दी स्टेडियम
नए जिला खेल अधिकारी प्रदीप पालीवाल को पिछले महीने पानीपत का कार्यभार सौंपा गया। जब वह स्टेडियम के पास आ गए तो उन्हें भी नहीं मिला था। इसके बाद उन्होंने स्टेडियम के गेट पर नाम लिखवाने का काम किया ताकि बाहर से आए खिलाड़ी या अधिकारी को ढूंढने में परेशानी न हो।
स्टेडियम में लगवाई गईं बेंच, बहुउद्देश्यीय हॉल का काम हुआ तेज
नए जिला शिक्षा अधिकारी ने खिलाड़ियों की सुविधा को देखते हुए कार्यलय के बाहर व स्टेडियम ग्राउंड के किनारे बेंच लगवाई हैं। खिलाड़ी अभ्यास करने के बाद वहां बैठ सकेंगे। इसके साथ ही बहुउद्दश्यीय हॉल का निर्माण तेज कर दिया गया, जिससे इंडोर गेम्स के खिलाड़ियों को अभ्यास में दिक्कत पेश नहीं आए।