पानीपत। शुगर मिल प्रबंधक ने नई मिल को बंद करने का एलान कर दिया है। पर्याप्त गन्ना न मिलने पर मिल को वीरवार रात को बंद किया जा सकता है। अगर बाहरी जिलों से पर्याप्त मात्रा में गन्ना और बगास मिलती है तो ही मिल को चालू रखा जाएगा। वरना इसे बंद करना पड़ेगा। बुधवार को शुगर मिल प्रबंधक नवदीप सिंह ने बताया कि प्रदेश की तकरीबन सभी सहकारी शुगर मिल पिराई सीजन समाप्त होने की वजह से बंद हो गई हैं। अब जिले में भी किसानों के पास गन्ना समाप्त हो चुका है।
ऐसे में मिल के पास आसपास के जिलों के किसानों और मिल प्रबंधकों की ओर से फरियाद आ रही हैं कि नई शुगर मिल को चालू रखें। उनके जिलों के किसानों के गन्ने की पिराई करें। पिछले कुछ दिनों से पानीपत की मिल दूसरे जिलों के किसानों का गन्ना भी पिराई कर रही हैं, लेकिन यह गन्ना मिल की क्षमता के अनुसार पर्याप्त मात्रा में नहीं आ रहा है। जिसके बाद मिल को बंद करना जरूरी माना जा रहा है।
उन्होंने बताया कि बुधवार को भी कई मिलों के प्रतिनिधियों का एक समूह आया और मिल चालू रखने का आग्रह किया। जिस पर उन्होंने स्पष्ट किया कि बहुत कम बगास बची है। उनकी मिल में रोजाना कम से कम 20 हजार क्विंटल गन्ना और बगास आएगी तो ही मिल को चालू रखा जा सकता है। उन्हें गन्ना या बगास नहीं मिली तो उन्हें वीरवार रात को ही मिल बंद करनी पड़ेगी।
पुरानी शुगर मिल की रोजाना गन्ना पिराई की क्षमता 18 हजार क्विंटल प्रतिदिन की है जबकि नई मिल की क्षमता 50 हजार क्विंटल की। पुरानी मिल को छहह माह पहले शु्रू किया गया था। जिसमें से अब तक करीब 26.50 लाख क्विंटल गन्ना पिराई किया गया है। 16 मार्च को नई मिल की शुरुआत की गई थी। इस दो माह में नई मिल ने साढ़े 17 लाख क्विंटल गन्ना पिराई किया है। यानी अब तक दोनों मिल 44 लाख से ज्यादा गन्ना पिराई कर चुकी हैं।