पानीपत। हर दंपती की तरह वृद्ध आश्रम की माताओं ने भी सपना देखा था कि वह बुढ़ापे में अपने बच्चों और पति के साथ रहेंगी लेकिन उनका यह सपना पूरा नहीं हो सका। बेटे और बहू ने इन्हें घर से नहीं निकाला बल्कि इनकी मजबूरी इन्हें वृद्ध आश्रम तक ले आई। बेटे और पति की मृत्यु के बाद इन्हें पानीपत के वृद्ध आश्रम के बारे में पता चला तो मजबूरी में वे यहां पर रहने लगीं। माताओं ने बताया कि 10 साल पहले तक वह सपना देखती थीं कि वह इस तरह से अपने बच्चे और पति के साथ रहेंगी लेकिन उनके जाने के बाद अब उनका सपना टूट गया। वह खुद को तो संभाल रही हैं।
घर बेचना पड़ गया, दूसरा बेटा खुद बीमार रहता है
वृद्ध आश्रम में रहने वाली राजरानी के जीवन में आम महिला की तरह ही सब चल रहा था। बीमारी से पति और दुर्घटना में एक बेटे की मृत्यु हो गई। इसके बाद दूसरे बेटे की तबीयत खराब रहती है। इलाज के लिए उन्होंने अपना घर बेचकर तहसील कैंप में रहना शुरू कर दिया। राजरानी चल नहीं सकती हैं और उनका बेटा बीमार रहता है। इससे वह उनकी देखभाल नहीं कर पा रहा था। फिर राजरानी वृद्ध आश्रम में आ गईं। राज रानी का कहना है कि हर किसी को अपने माता पिता की सेवा करने का मौका नहीं मिलता। यदि आपको यह मौका मिल रहा है तो उनकी सेवा करो।
बंगाल से काम करने आई थी पानीपत, मजबूरी ने पहुंचाया वृद्ध आश्रम
बंगाल से काम करने के लिए भानू देवी दिल्ली आईं, जहां उन्होंने अपने पति और बेटे के साथ कुछ वर्षों तक काम किया। दिल्ली से रोजगार की तलाश में पानीपत आईं। पानीपत आने के दो साल बाद ही उनके पति और बड़े बेटे की बीमारी से मृत्यु हो गई। इसके बाद वह पानीपत में अकेले यहां वहां भटकने लगीं। फिर उन्हें पता चला कि वह वृद्ध आश्रम में रह सकती हैं। इसके बाद दो साल से वह यहीं रहती हैं। भानू का छोटा बेटा मद्रास में रहता है। वह नशेड़ी है और अब बीमार रहता है। इसलिए वह उसके पास नहीं जाना चाहती हैं।