पानीपत। क्षेत्र में प्रदूषण फैलाने के आरोपों में घिरे पानीपत थर्मल पावर प्लांट की मुश्किलें बढ़ रही है। थर्मल पर लगे इन आरोपों पर एनजीटी सुनवाई कर रही है। शुक्रवार को सुनवाई के दौरान एनजीटी ने मामले की सुनवाई के लिए आखिरी तारीख 18 जनवरी तय की है।
एनजीटी कोर्ट में शुक्रवार को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी व थर्मल के वकीलों ने अपनी दलीलें रखीं। सीपीसीबी की रिपोर्ट अधूरी थी, क्योंकि भूजल, फसलों के, मिट्टी के व हवा के सैंपल की रिपोर्ट नहीं आई है। ये सैंपल थर्मल के आसपास के क्षेत्रों से लिए गए थे। इन सैंपल की रिपोर्ट से ही पता चलेगा कि पर्यावरण को थर्मल से कितना नुकसान पहुंचा है।
सीपीसीबी ने भी एनजीटी कोर्ट से समय मांगा था। सीपीसीबी ने स्वास्थ्य विभाग से ये रिपोर्ट मांगी है कि स्वास्थ्य केंद्रों में किस प्रकार के कितने रोगी आ रहे हैं। गांव सुताना, जाटल, खुखराना गांव व थर्मल कॉलोनी के एलर्जी, चर्म रोग, कैंसर व आंखों की बीमारी के मरीजों का डेटा लिया जा रहा है। ये डेटा एनजीटी कोर्ट में 18 जनवरी को पेश किया जाएगा। 18 जनवरी को सुनवाई के बाद एनजीटी थर्मल पर बड़ा फैसला ले सकता है।
सीपीसीबी तैयार कर रही मामले की रिपोर्ट
थर्मल के मामले की रिपोर्ट सीपीसीबी तैयार कर रही है। शुक्रवार को इस मामले की एनजीटी कोर्ट में सुनवाई हुई है। सुनवाई के बाद मामले में अगली तारीख 18 जनवरी तय की गई है। एनजीटी के जो भी निर्देश होंगे उनके अनुसार काम किए जाएंगे।
कमलजीत सिंह, क्षेत्रीय ऑफिसर, हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड