मतलौडा। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत पौने चार करोड़ की लागत से पीडब्ल्यूडी ने गांव नारा से अलुपर तक आठ किलोमीटर लंबी सड़क बनाई। पांच साल की गारंटी वाली इस सड़क की बजरी पांच दिन में ही उखड़ने लगी है। हालात ये है कि सड़क पर पैदल चलने और हाथ लगाने पर ही बजरी बाहर आ रही है। इससे ग्रामीणों में रोष है। उन्होंने पीडब्ल्यूडी कार्यालय के बहार धरना देने की चेतावनी दी है।
ग्रामीणों ने बताया कि सड़क बनाए जाने के दौरान ही घटिया निर्माण सामग्री के इस्तेमाल पर आपत्ति जताई थी। पीडब्ल्यूडी अधिकारी भी मौके पर आए और ठेकेदार पर कार्रवाई करने की बजाए ग्रामीणों को धमकाना शुरू कर दिया था। कहा था कि सड़क सही बन रही है। अब फिर से शिकायत की गई तो जवाब मिला कि सड़क बिलकुल ठीक है। इस पर ग्रामीणों ने पीडब्ल्यूडी अधिकारियों और ठेकेदार की शिकायत जिला प्रशासन के साथ ही सीएम विंडो पर की है। ग्रामीणों ने बताया कि उनके पास सड़क निर्माण में की गई धांधली का वीडियो भी है। जिसे उपायुक्त को सौंपेंगे।
तय समय से पहले ही ठेकेदार ने पूरा किया सड़क का काम
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के बैच-2 के अंतर्गत इस सड़क का निर्माण करवाया गया है। ये सड़क गांव नारा से लेकर अलुपुर तक वाया गांव अदियाना होते हुए जाती है। इसकी लंबाई 7.79 किलोमीटर और चौड़ाई 11 फीट रही है। विभाग ने निर्माण के लिए एजेंसी को 3.62 करोड़ का टेंडर तक दिया था। इस पर काम तीन जुलाई 2021 को शुरू हुआ था, जिसे पूरा करने की तिथि 2 जनवरी 2022 तय की गई थी लेकिन इसी बीच ठेकेदार ने इस सड़क का काम तय समय सीमा से पहले ही निपटा दिया है।
ग्रामीणों ने लगाया भ्रष्टाचार का आरोप
ग्रामीण ईश्वर सिंह, राजेश, सुरजीत, परमजीत, रोहतास, सुरेंद्र, देवेंद्र समेत कई ग्रामीणों ने पीडब्ल्यूडी अधिकारियों समेत ठेकेदार पर सड़क में घटिया सामग्री का इस्तेमाल करने के आरोप लगाया हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जो सड़क पांच दिन नहीं टिक पाई, पांच साल कैसे निकालेगी। जो सड़क चलने और हाथ लगाने से उखड़ रही है, वाहनों का बोझ कैसे झेलेगी। ग्रामीणों ने कहा कि दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो पीडब्ल्यूडी कार्यालय के सामने धरना देंगे।
कार्रवाई करेंगे, भुगतान रोका
मामला संज्ञान में है। अभी ठेकेदार को भुगतान नहीं किया गया है। जब तक काम ढंग से पूरा नहीं हो जाता, भुगतान नहीं किया जाएगा। घटिया निर्माण सामग्री के इस्तेमाल पर कार्रवाई का प्रावधान है। - रामपाल सिंह, एसडीओ, पीडब्ल्यूडी, पानीपत