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सितंबर से नैन गोभ्यारण में छोड़े जाएंगे शहर के 2000 बेसहारा पशु, निगम व गौशाला में बनी सहमति

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शहर में घूमने वाले करीब दो हजार बेसहारा पशुओं को सितंबर माह से नैन गोभ्यारण में ही छोड़ने का काम शुरू हो जाएगा। इनके चारे के लिए निगम हर माह तीन लाख रुपये से चार लाख रुपये भी देगा। वहीं, गोशाला में कच्चे मैदान को पक्का भी करवाएगा। सोमवार को नैन गोभ्यारण समिति और निगम के बीच इसे लेकर समझौता हुआ है। इसे लेकर मेयर अवनीत कौर और आयुक्त आरके सिंह ने भी नैन गोभ्यारण का दौरा भी किया।
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वहीं, गोशाला प्रधान राजरूप पान्नू ने बताया कि वे समाज सेवियों के दान की वजह से गोशाला चला पा रहे हैं। एक गोवंश का प्रतिदिन का खर्च करीब सौ रुपये तक होता है। इसमें उसका चारा, पानी, दवा, शेड व लेबर तक का खर्च शामिल होता है। निगम के अलावा शहर के कई दानी सज्जन गोशाला में दान करते हैं जिससे गोवंशों को काम चल रहा है। इस समय पानीपत शहर में करीब दो हजार गोवंश घूम रहे हैं। वहीं, नैन गोभ्यारण में भी करीब दो हजार गोवंश हैं। तीन लाख रुपये चारे खर्च के लिए पर्याप्त नहीं है। इसलिए निगम से बजट बढ़ाने की डिमांड की गई थी। वहां कच्ची जमीन ज्यादा होने की वजह से बरसाती सीजन में कीचड़ बन जाता है। इसे लेकर जमीन को साधारण ईंटों से पक्का करवाने की बात भी कही है। इन दोनों बातों को लेकर सोमवार को आयुक्त व मेयर से मुुलाकात की गई थी। जिस पर निगम ने रजामंदी दी है।
मेयर ने कहा कि सोमवार को गोशाला प्रबंधन से मीटिंग की गई थी। इसके बाद नैनगोभ्यारण का दौरा भी किया गया। गोशाला प्रबंधन की समस्या भी जांची गई। इस पर आयुक्त से बातचीत भी की गई। फैसला लिया गया कि निगम गोशाला को हर संभव मदद मुहैया करवाएगा। तीन लाख रुपये प्रतिमाह की जगह अब चार लाख रुपये प्रतिमाह बजट दिया जाएगा और वहां कच्ची जमीन पर ईंट बिछवाकर उसे पक्का करवाया जाएगा।
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