एनजीटी द्वारा रिफाइनरी पर पर्यावरण को प्रदूषित करने पर 17 करोड़ जुर्माना लगाने के बाद शहरवासियों का एनजीटी पर विश्वास बढ़ रहा है। अब उद्योगों से निकलने वाले प्रदूषण से परेशान लोग हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को छोड़कर सीधा एनजीटी का दरवाजा खटखटा रहे हैं। एनजीटी भी लोगों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए कड़े निर्देश जारी कर रहा है। एनजीटी ने लोगों की शिकायतों पर पानीपत के दो और बड़े उद्योग कपूर इंडस्ट्रीज लिमिटेड व लिप्रो हर्बल प्रा. लिमिटेड की जांच कर रिपोर्ट सौंपने के लिए सीपीसीबी व एचएसपीसीबी को एक माह का समय दिया है।
एनजीटी ने सभी उद्योगों को भू जल निकालने के लिए एनओसी लेने के निर्देश दिए गए हैं। जिनके पास एनओसी नहीं है। उनको बंद करने के निर्देश दिए हैं। एनजीटी ने अब शहरवासी सुरेश कुमार की एक शिकायत पर कपूर इंडस्ट्रीज लिमिटेड व लेप्रो हर्बल प्रा. लिमिटेड के खिलाफ एनजीटी में याचिका दायिर की है। इन दोनों फर्म पर आरोप है कि ये अपना प्रदूषित पानी भूमिगत जल में पाइप के द्वारा छोड़ते हैं। एनजीटी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सीपीसीबी व एचएसपीसीबी को एक माह में मामले की जांच कर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं। इस संबंध में दोनों विभागों को पत्र भी जारी कर दिया गया है। विदित है कि इससे पहले एनजीटी ने सेक्टर 29 पार्ट टू की केएसबी फर्म की जांच करने के भी निर्देश दिए हैं। केएसबी फर्म पर बिना एनओसी के भू जल का दोहन करने व प्रदूषित पानी को भूजल में छोड़ने के आरोप है। इससे पहले भी एनजीटी पानीपत के 47 बड़े उद्योगों पर कार्रवाई के निर्देश दे चुका है। हालांकि प्रशासन की लापरवाही के कारण उन पर कार्रवाई नहीं हो पाई है। अब एनजीटी ने दोबारा प्रशासन को एक माह का समय दिया है। डीसी सुमेधा कटारिया ने बताया कि उद्योगों से रिकवरी करने के मामले की जांच सीटीएम को सौंपी गई थी, लेकिन उनका तबादला हो गया। इस कारण जांच पूरी नहीं हो पाई। अब दोबारा मामले में कार्रवाई कर रिकवरी की जाएगी।
400 से अधिक यूनिट निकाल रही बिना परमिशन के भूजल :
दिल्ली के शैलेश कुमार की शिकायत पर सीपीसीबी ने पानीपत की 47 इंडस्ट्रीज के खिलाफ जांच के आदेश दिए हैं। यहां 400 से अधिक डाइंग यूनिट हैं, जो बिना अनुमति के पानी निकाल रही है। इस ओर तो बोर्ड का अभी ध्यान ही नहीं गया है।
ग्राउंड वाटर की क्वालिटी खराब होने पर सील होंगे सभी ट्यूबवेल :
सीपीसीबी ने नगर निगम को पेयजल के लिए उपयोग हो रहे ग्राउंड वाटर की जांच करने का आदेश दिया है। साथ ही कहा कि जो विभाग पानी की सप्लाई कर रहा है। उस पानी के सैंपल की जांच होनी चाहिए। यह जांच पानी जांचने वाली किसी एजेंसी से कराई जाए। अगर पानी की क्वालिटी खराब है तो उस ट्यूबवेल को सील कर दिया जाए।
यूनिटों का किया था निरीक्षण :
सीपीसीबी ने मार्च और अप्रैल महीने में पानीपत की करीब 56 यूनिटों का निरीक्षण किया था। इनके ईटीपी के सैंपल लेने के साथ पर्यावरण और जल प्रदूषण को देखते हुए सैंपल लिए थे। सैंपल में एक के बाद एक सभी यूनिटें फेल होती चली गई।
टेक्सटाइल इंडस्ट्री फैला रही प्रदूषण :
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने अपने नोटिसों में पानीपत के उद्योगों पर टिप्पणी भी की है। बोर्ड के चेयरमैन एसपी सिंह परिहार ने जारी नोटिसों में कहा कि टेक्सटाइल इंडस्ट्री बहुत ज्यादा प्रदूषण फैला रही है। सीधे और दूसरे रास्ते से जमीन पर पानी छोड़ा जा रहा है। इससे भूजल खराब हो रहा है। जबकि केंद्र सरकार ने इसके नियम लागू किए हैं। पर्यावरण सुरक्षा समिति और यूनियन ऑफ इंडिया ने 22 फरवरी 2017 को ईटीपी जरूरी बताया था।
सीजीडब्ल्यूए की परमिशन तक नहीं :
सेंट्रल ग्राउंड वाटर अथॉरिटी (सीजीडब्ल्यूए) की परमिशन लेनी होती है। सीपीसीबी की जांच में कई एक्सपोर्ट और डाइंग यूनिटों में इसकी अवहेलना मिली। इससे पहले भी आधा दर्जन यूनिटों में इसी तरह की कमी मिली थी। सीपीसीबी ने पर्यावरण प्रोटेक्शन एक्ट-1986 की सेक्शन-5 के तहत कार्रवाई करते हुए क्लोजर नोटिस जारी किए हैं।
पीसीबी के पास 636 यूनिट ही रजिस्टर्ड :
हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पास 636 यूनिट रजिस्टर्ड हैं। इनमें से 418 पर ईटीपी लगे हैं। 550 में एयर कंट्रोल डिवाइस लगे हैं। 389 यूनिटों से अति संवेदनशील वेस्ट निकलता है।
पानीपत के पानी में मिल चुका है साइनाइड :
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अपनी जांच में पानीपत के पानी को पीने के लिए अयोग्य बता चुकी है। सेक्टर 29 के पानी में साइनाइड की भी 0.3 प्रतिशत मात्रा मिल चुकी है। बावजूद इसके उद्योग अब भी भूजल में प्रदूषित जल छोड़ रहे हैं। उद्योगों के कारण ही यमुना का पानी भी प्रदूषित हो रहा है।