पानीपत। संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर पानीपत में तीन रेलवे ट्रैक पर छह घंटे तक किसान डटे रहे। गद्दे बिछाकर और हुक्का एवं ताश लेकर किसान ट्रैक पर बैठे रहे। किसानों की मांग रही कि लखीमपुर खीरी प्रकरण में गृह राज्यमंत्री अजय मिश्रा को बर्खास्त किया जाए। मंत्री की गिरफ्तारी के साथ ही सभी दोषियों को पकड़ा जाए। देशव्यापी रेल रोको आंदोलन के छह घंटे के दौरान दिल्ली और अंबाला जाने वाली 18 ट्रेनों को रद्द किया गया। जो ट्रेन सुबह 10 बजे से पहले आईं, उन्हें पानीपत रेलवे स्टेशन पर रोका गया।
किसान सुबह 10 बजे टीडीआई पुल के नीचे, इसराना और मतलौडा के गांव भालसी के पास रेलवे ट्रैक पर पहुंच गए। किसान यूनियन और भारत का झंडा लेकर किसान आए थे। कोई पैदल, कोई साइकिल तो कोई कार से प्रदर्शन स्थल पर पहुंचा। पटरियों पर गद्दे बिछाए गए और हुक्का रखने के साथ किसान बैठ गए। ये तीन रेलवे ट्रैक पानीपत-चंडीगढ़, जींद-पानीपत और रोहतक-पानीपत रहे, जो सुबह 10 से लेकर शाम चार बजे तक पूरी तरह बाधित रहे।
- दादा के राज में जितने किसानों की हत्या हुई, क्या उसकी जिम्मेदारी ली थी : किसान
इस मौके पर किसानों ने उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी। किसानों ने कहा कि उपमुख्यमंत्री ने बयान दिया है कि 30 किसान संगठनों को मिलकर सुखबीर सिंह की हत्या की जिम्मेदारी लेनी चाहिए, ऐसे में उनके दादा के राज में आंदोलनों के दौरान जितने भी किसानों की हत्या हुईं, हंगामे हुए, क्या उसकी जिम्मेदारी उनकी पार्टी और उनके दादा ने ली थी।
- टीडीआई पुल के नीचे भारी पुलिस बल रहा तैनात
टीडीआई पुल के नीचे भारी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा। जीआरपी एवं जिले के अन्य थाने के 20 से ज्यादा पुलिस कर्मी तैनात रहे। पिछले रेल रोको आंदोलन के मुकाबले इस बार पुलिस बल की संख्या अधिक रही। सिंघु बॉर्डर एवं लखीमपुर खीरी में हिंसा को देखते हुए इस बार जीआरपी ने अतिरिक्त पुलिसकर्मी की मांग की थी। अलग-अलग थानों से 32 अतिरिक्त पुलिसकर्मी बुलाए गए थे।
- किसानों का कहना
दुष्यंत ने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा सुखबीर की मौत की जिम्मेदारी ले ले। पहले वह अपने दादा परदादा के समय में प्रदर्शन में मृतकों की जिम्मेदारी ले लें। हम किसानों का सुखबीर की मौत में कोई लेना देना नहीं। वह निंदनीय घटना है।
- जगबीर सिंह, किसान, उपप्रधान भाकियू
सरकार हम किसानों के साथ मजाक कर रही है। 11 महीने से चल रहे किसान आंदोलन में लगातार किसानों की समस्याओं और धरना प्रदर्शन को देखते हुए सरकार कृषि कानून तो रद्द कर ही नहीं रही है। साथ में हम किसानों पर सरकार गाड़ी चढ़ाने का काम और कर रही है।
- सुखबीर सिंह, किसान, गांव बबैल
पूरे जिले में तीन जगह पर किसान रेलवे ट्रैक पर बैठे। शांतिपूर्ण तरीके से रेल रोको आंदोलन किया गया। अब संयुक्त किसान मोर्चा से अगले आदेश का इंतजार है। यदि सरकार अजय मिश्रा को नहीं हटाती है तो प्रदर्शन चलते रहेंगे।
- सोनू मालपुरिया, जिला प्रधान, भाकियू