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तूड़े की कमी से पशुपालकों की बढ़ेगी मुश्किल

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समालखा। तूड़े की कमी इस बार दिक्कत पैदा करेगी। पशुपालकों को तूड़े की कमी के साथ ही ज्यादा कीमत पर खरीदने के लिए अपनी जेब भी ढीली करनी पड़ सकती है। तूड़े की कमी के कारण आम पशुपालकों, गोशालाओं के लिए चारे की समस्या पैदा होने से परेशानी बढ़ेगी। हालत ये हैं कि शहर की एक गोशाला में मात्र 15 दिन का तूड़ा ही बचा है।
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इस बार गर्मी समय से पहले आने और गेहूं की नाली पतली होने के कारण ये समस्या आई है। साथ ही आसपास के राज्यों में किसानों की ओर से तूड़ा भेजा जाना भी कमी का कारण बनेगा। बदलते मौसम के मिजाज के कारण अचानक समय से पहले गर्मी पड़ने, गेहूं की नाली पतली होने के कारण खेतों से तूड़ा कम निकल रहा है। गत और वर्तमान सीजन का आंकलन किया जाए तो प्रति एकड़ करीब आठ क्विंटल कम तूड़ा निकल रहा है।
किसान रणधीर, कुलदीप, चांद और महेश ने बताया कि पहले एक एकड़ से करीब 60 मन (24 क्विंटल) तूड़ा निकलता था लेकिन इस बार यह घटकर करीब 35-40 मन (14-16 क्विंटल) पर आ गया है। औसतन एक एकड़ में करीब आठ क्विंटल कम तूड़ा निकल रहा है।
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किसानों ने बताई वजह
तूड़ा कम निकलने के कई कारण बताए जा रहे हैं। किसानों का कहना है कि इस बार गर्मी समय से पहले आने के कारण गेहूं की नाली पतली होने से तूड़ा कम निकल रहा है। साथ ही हाथ से कटाई की बजाय मशीन की तरफ बढ़ने से भी तूड़े में कमी आ रही है। गेहूं का उत्पदान गत वर्ष की तुलना में कम हुआ है और ये भी कमी का कारण बनेगा।
कमी ने बढ़ाए तूड़े के रेट
तूड़े की कमी के बीच अभी से इसके दाम आसमान छूने लगे हैं। गत वर्ष तूड़ा चार से पांच सौ रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा था। इस बार अभी से इसके दाम सात सौ से आठ सौ रुपये क्विंटल तक पहुंच गए हैं। राजस्थान में तूड़ा का रेट अधिक मिलने की उम्मीद में किसान वहां भी तूड़ा भेज रहे हैं।
गोशाला में केवल 15 दिन का तूड़ा बचा
तूड़े की कमी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि नई अनाज मंडी स्थित राधा-कृष्ण गोशाला में मुश्किल से 15 दिन का तूड़ा ही बचा है। गोशाला प्रधान बलीमल ने बताया कि 18 वर्ष में पहली बार इस तरह की समस्या सामने आई है। करीब 10 प्रतिशत ही तूड़ा मिल पाया है। उनकी गोशाला में करीब साढ़े तीन सौ गाय है और तूड़े की कमी परेशानी बढ़ाएगी। उन्होंने कहा कि दान का तो दूर मोल का भी तूड़ा नहीं मिल रहा।
मुश्किल से स्टॉक पूरा होने की उम्मीद
भापरा रोड स्थित बेसहारा गोवंश चिकित्सालय के उपप्रधान कुलदीप रोहिल्ला ने बताया कि इस बार तूड़े की कमी सामने आ रही है। वह अपने यहां करीब चार सौ क्विंटल तूड़ा स्टॉक में रखते हैं। इस समय तक गोदाम भर जाते थे लेकिन इस बार काफी मुश्किल से कोटा पूरा होने की उम्मीद है।
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तूड़े की होगी कमी, गोशालाएं एवं पशुपालकों की बढ़ी परेशानी
- एक एकड़ भूमि में से करीब आठ क्विंटल तूड़ा कम निकल रहा इस बार
- गोशाला के प्रधान ने कहा कि 18 वर्ष में पहली बार ऐसी दिक्कत सामने आई
- समय से पहले गर्मी और गेहूं की नाली पतली होने के कारण बनी है समस्या
कुलदीप राठी
समालखा। तूड़े की कमी इस बार दिक्कत पैदा करेगी। पशुपालकों को तूड़े की कमी के साथ ही ज्यादा कीमत पर खरीदने के लिए अपनी जेब भी ढीली करनी पड़ सकती है। तूड़े की कमी के कारण आम पशुपालकों, गोशालाओं के लिए चारे की समस्या पैदा होने से परेशानी बढ़ गई है। हालत ये हैं कि शहर की एक गोशाला में मात्र 15 दिन का तूड़ा ही बचा है।
इस बार गर्मी समय से पहले आने और गेहूं की नाली पतली होने के कारण ये समस्या आई है। साथ ही आसपास के राज्यों में किसानों की ओर से तूड़ा भेजा जाना भी कमी का कारण बनेगा। बदलते मौसम के मिजाज के कारण अचानक समय से पहले गर्मी पड़ने, गेहूं की नाली पतली होने के कारण खेतों से तूड़ा कम निकल रहा है। गत और वर्तमान सीजन का आंकलन किया जाए तो प्रति एकड़ करीब आठ क्विंटल कम तूड़ा निकल रहा है।
किसान रणधीर, कुलदीप, चांद और महेश ने बताया कि पहले एक एकड़ से करीब 60 मन (24 क्विंटल) तूड़ा निकलता था। लेकिन इस बार यह घटकर करीब 35-40 मन (14-16 क्विंटल) पर आ गया है।औसतन एक एकड़ में करीब आठ क्विंटल कम तूड़ा निकल रहा है।
- किसानों ने बताई वजह
तूड़ा कम निकलने के कई कारण बताए जा रहे हैं। किसानों का कहना है कि इस बार गर्मी समय से पहले आने के कारण गेहूं की नाली पतली होने से तूड़ा कम निकल रहा है। साथ ही हाथ से कटाई की बजाय मशीन की तरफ बढ़ने से भी तूड़े में कमी आ रही है। गेहूं का उत्पदान गत वर्ष की तुलना में कम हुआ है और ये भी कमी का कारण बनेगा।
- कमी ने बढ़ाए तूड़े के रेट
तूड़े की कमी के बीच अभी से इसके दाम आसमान छूने लगे हैं। गत वर्ष तूड़ा 4 से 5 सौ रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा था। इस बार अभी से इसके दाम 7 सौ से 8 सौ रुपये क्विंटल तक पहुंच गए हैं। राजस्थान में तूड़ा का रेट अधिक मिलने की उम्मीद में किसान वहां भी तूड़ा भेज रहे हैं।
- गोशाला में केवल 15 दिन का तूड़ा बचा
तूड़े की कमी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि नई अनाज मंडी स्थित राधा-कृष्ण गोशाला में मुश्किल से 15 दिन का तूड़ा ही बचा है। गोशाला प्रधान बलीमल ने बताया कि 18 वर्ष में पहली बार इस तरह की समस्या सामने आई है। करीब 10 प्रतिशत ही तूड़ा मिल पाया है। उनकी गोशाला में करीब साढ़े तीन सौ गाय है और तूड़े की कमी परेशानी बढ़ाएगी। उन्होंने कहा कि दान का तो दूर मोल का भी तूड़ा नहीं मिल रहा।
- मुश्किल से स्टॉक पूरा होने की उम्मीद
भापरा रोड स्थित बेसहारा गोवंश चिकित्सालय के उपप्रधान कुलदीप रोहिल्ला ने बताया कि इस बार तूड़े की कमी सामने आ रही है। वह अपने यहां करीब 4 सौ क्विंटल तूड़ा स्टॉक में रखते हैं। इस समय तक गोदाम भर जाते थे लेकिन इस बार काफी मुश्किल से कोटा पूरा होने की उम्मीद है।
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