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सिविल अस्पताल में नए साल से डीएनबी कोर्स

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पानीपत। सिविल अस्पताल में विशेषज्ञों की कमी पूरी करने के लिए डिप्लोमा ऑफ नेशनल बोर्ड (डीएनबी) कोर्स शुरू किया जाएगा। जनवरी के पहले सप्ताह से यह शुरू हो जाएगा। सिविल अस्पताल के विशेषज्ञ डॉक्टर ही एमबीबीएस विद्यार्थियों को प्रशिक्षण देंगे। ये कोर्स तीन साल का होगा, जिसके पूरा होते ही विद्यार्थी को विशेषज्ञ डॉक्टर की उपाधि मिलेगी। इसके बाद ये अस्पताल में विशेषज्ञ के तौर पर काम कर सकेंगे।
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फिलहाल सिविल अस्पताल में स्त्री रोग एवं प्रसूति विषय का प्रशिक्षण शुरू होगा, क्योंकि सिविल अस्पताल में तीन महिला रोग विशेषज्ञ हैं। धीरे-धीरे अन्य कोर्स भी शुरू होंगे। सिविल अस्पताल में कार्यरत महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. लिपिका, डॉ. शशिलता और डॉ. मनी ने विद्यार्थियों को प्रशिक्षण देने के लिए आवेदन किया है। इनको सरकार की ओर से अतिरिक्त भत्ता भी मिलेगा। इस कोर्स का उद्देश्य विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी को पूरा करना है।
लाइब्रेरी तैयार, किताबें आनी बाकी
अस्पताल प्रशासन ने कोर्स के लिए 2.39 लाख रुपये पहले ही जमा करा दिए हैं। लाइब्रेरी का इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार हो चुका है, अब किताबें आनी हैं। यह एमडी (डॉक्टर आफ मेडीसिन) एवं एमएस (मास्टर इन सर्जरी) का समकक्ष कोर्स है। सरकारी डॉक्टर की तीन साल की फीस 1.48 लाख लगेगी। नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन (एनबीई) से पानीपत के अस्पताल को दो सीट मिलने की उम्मीद है।
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अगले सत्र से नेत्र एवं दंत रोग का प्रशिक्षण हो सकता है शुरू
सिविल अस्पताल में तीन नेत्र रोग विशेषज्ञ हैं, लेकिन एक विशेषज्ञ का अनुभव दो साल का है, इसलिए वे लेक्चर नहीं दे सकते हैं। एक और विशेषज्ञ की नियुक्ति के बाद नेत्र रोग की भी पढ़ाई शुरू हो सकती है। यहां तीन दंत रोग विशेषज्ञ भी हैं। ऐसे में अगले सत्र तक नेत्र के साथ ही दंत रोग से संबंधित कोर्स भी जल्द शुरू हो सकता है।
मूल्यांकन हो चुका है पूरा
कोर्स संबंधी 50 से अधिक पुस्तकें आनी हैं। एक लेक्चर रूम भी बनाया गया है। लैब तैयार की जाएगी, इसमें एक कैडेवर (महिला की मृत देह) भी होगी। इससे डॉक्टर को शरीर की संरचना और अंदरूनी अंगों की जानकारी मिलेगी। राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड की टीम मूल्यांकन कर चुकी है। कोई डॉक्टर दाखिला लेने के तीन दिन बाद डीएनबी कोर्स छोड़ता है तो उसकी फीस वापस नहीं की जाएगी।
एमडी-एमएस के समकक्ष डीएनबी कोर्स
सरकारी चिकित्सकों और इतनी ही नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (नीट) से भरी जाएंगी। रोहतक पीजीआई सीटें तय करेगा। पहले से पीजी-एमडी का कोर्स कर रहे चिकित्सकों को डीएनबी का लाभ नहीं मिलेगा। डीएनबी तीन साल का पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स है। एमबीबीएस के उपरांत इस कोर्स को किया जा सकता है। यह एमडी (डॉक्टर आफ मेडिसिन) व एमएस(मास्टर इन सर्जरी) के समकक्ष है। इसे स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय भारत सरकार ने शुरू किया है।
अस्पताल का इंफ्रास्ट्रक्चर लगभग तैयार है। कुछ पुस्तकें आनी है। सरकार से हरी झंडी मिलते ही कोर्स शुरू हो जाएगा। जनवरी के पहले सप्ताह से कोर्स शुरू होने की उम्मीद है। - डॉ. संजीव ग्रोवर, पीएमओ, सिविल अस्पताल
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