पानीपत। सनातन धर्म में कार्तिक मास के कृष्णपक्ष की त्रयोदशी तिथि को धनतेरस पर्व मनाया जाता है। यमराज को दीपदान के लिए सायंकाल व्याप्त त्रयोदशी की प्रधानता मानी जाती है। अत: मंगलवार शाम त्रयोदशी तिथि मिलने के कारण दो नवंबर को ही धनतेरस मनाया जाएगा। धनतेरस पर शुभ त्रिपुष्कर योग भी बन रहा है। अवध धाम मंदिर से ज्योतिषाचार्य पंडित राधे-राधे के अनुसार इस दिन सोना-चांदी, स्टील, फूल, पीतल के बर्तन की खरीदारी करना शुभ माना गया है। इस दिन शाम को घर के बाहर मुख्य दरवाजे पर एक पात्र में अन्न रखकर उस पर यमराज के निमित्त दक्षिणाभिमुख दीपदान करना चाहिए। धनतेरस के दिन यमुना नदी में स्नान का भी विशेष महत्व है।
त्रिपुष्कर योग में किए कार्य का प्राप्त होता है तिगुना फल
धनतेरस के दिन विशेष नक्षत्रों और कालखंड के संयोग से त्रिपुष्कर योग बन रहा है। त्रिपुष्कर योग दो नवंबर मंगलवार सुबह 8:35 बजे से तीन नवंबर को सुबह 7:14 बजे तक रहेगा। इस योग में जो भी कार्य किया जाता है, उसका तिगुना फल प्राप्त होता है। त्रिपुष्कर योग के अलावा अमृत योग भी धनतेरस के दिन बन रहा है। अमृत योग नई चीजों की खरीदारी के लिए उत्तम माना गया है। यह योग धनतेरस के दिन सुबह 10:30 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक रहेगा।
धनतेरस के दिन तुला राशि में गोचर करेंगे सूर्य, मंगल और बुध ग्रह
इसमें सूर्य, मंगल और बुध ग्रह धनतेरस के दिन तुला राशि में गोचर करेंगे। बुध और मंगल मिलकर धन योग का निर्माण करते हैं। वहीं सूर्य-बुध की युति बुधादित्य योग का निर्माण करेगी। इस योग को राजयोग की श्रेणी में रखा गया है। यह योग तुला राशि में बन रहा है, जो व्यापार की कारक राशि मानी जाती है। मंगल-बुध की युति व्यापार के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है।
पंचपर्व में किस दिन कौन-सा पर्व
- 2 नवंबर को धनतेरस पर धन के देवता कुबेर और आयुर्वेदिक के जनक भगवान धनवंतरि की पूजा होगी। इस दिन दीपावली पूजा के लिए खरीदारी होती है। सजावटी सामान खरीदे जाते हैं, साथ ही इस दिन नए उपहार, सोना, सिक्का, बर्तन, गहनों की खरीदारी करना शुभ रहता है।
- 3 नवंबर को रूप चौदस हस्त नक्षत्र, चित्रा नक्षत्र एवं प्रीति योग में मनाई जाएगी। इसे रूप चतुर्दशी, नरक चौदस और काली चौदस के नाम से भी जाना जाता है।
- 4 नवंबर को दीपावली मनाई जाएगी।
- गोवर्धन पूजा का पर्व 5 नवंबर शुक्रवार को मनाया जाएगा।
- यम द्वितीया, भाई दूज का पर्व 6 नवंबर मनाया जाएगा। इस दिन बहनें अपने भाइयों को तिलक कर उनकी दीर्घायु की कामना करती हैं। इसी दिन चित्रगुप्त और विश्वकर्मा की भी पूजा की जाती है। इस दिन अनुराधा नक्षत्र शोभान योग और अमृत योग भी रहेगा।
धनतेरस पर झाडू़ खरीदना अति शुभ
धनतेरस के झाडू़ खरीदना काफी शुभ होता है। ऐसा माना जाता है कि धनतेरस के दिन खरीदी गई झाडू से भी घर को एक बार साफ करना चाहिए और इन झाडू़ को छुपाकर रखना चाहिए, जिससे घर में बरकत बनी रहती है। मत्स्य पुराण में झाडू़ को मां लक्ष्मी का रूप बताया गया है। झाडू़ को सुख-शांति बढ़ाने और दुष्ट शक्तियों का सर्वनाश करने वाला भी दर्शाया गया है। झाडू़ घर से दरिद्रता दूर करती है। धनतेरस पर घर में नई झाडू़ से झाडू़ लगाने से कर्ज से भी मुक्ति मिलती है। झाडू़ से घर में सकारात्मकता का संचार होता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार धनतेरस पर धनतेरस के दिन एक नहीं बल्कि तीन झाडू़ खरीदनी चाहिए। धनतेरस पर खरीदी गई झाडू़ से दिवाली के दिन मंदिर में साफ-सफाई करना भी शुभ माना जाता है। धनतेरस पर रविवार और मंगलवार को झाडू़ नहीं खरीदने की भी परंपरा है।
धनतेरस के दिन पूजा मुहूर्त
- धनतेरस पूजा मंगलवार, 2 नवंबर।
- धनतेरस पूजा मुहूर्त- शाम 06.16 बजे से 08.11 बजे तक।
- त्रयोदशी तिथि प्रारंभ- 2 नवंबर को सुबह 11.31 बजे
- त्रयोदशी तिथि समाप्त- 3 नवंबर को सुबह 09.03 बजे
प्रदोष काल- शाम 5.48 से रात्रि 8.21 बजे तक
वृषभ लग्न- शाम 6.32 से रात्रि 8.30 बजे तक
लाभ- शाम 7.24 से 8.59 बजे तक