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अपराधी समाज के लिए खतरा, सुधार या पुनर्वास से परे

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अपराधी समाज के लिए खतरा हैं और सुधार या पुनर्वास से परे हैं। 12 वर्ष की बच्ची का अपहरण कर दुष्कर्म और हत्या करने के दोषियों को फांसी की सजा सुनाते हुए अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुमित गर्ग की अदालत में यह बात सामने आई।
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खंड मतलौडा में मामा के साथ रह रही छठी कक्षा में पढ़ने वाली अनाथ बच्ची के साथ हुए जघन्य अपराध में 1496 दिन की सुनवाई के बाद न्याय मिला। फांसी की सजा सुनते ही दोषी प्रदीप और सागर के चेहरे रुआसे हो गए। उनके चेहरे पर बेशक पछतावा था, लेकिन अपराध बेहद जघन्य था।
वकील अनुज चौधरी के मुताबिक शुक्रवार शाम साढ़े चार बजे अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुमित गर्ग की अदालत ने दोनों दोषियों को फांसी की सजा सुनाई। दोपहर साढ़े 12 बजे पुलिस दोनों आरोपियों को लेकर कोर्ट में पेश हुई और शाम साढ़े चार बजे सजा सुनाई गई। इस मामले में अदालत 10 फरवरी को फैसला सुरक्षित कर लिया था और मामले में शुक्रवार को सजा सुनाई गई। सजा के बाद पुलिस दोनों को पानीपत जेल ले गई। अब दोषियों की फांसी की सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका लगाने के लिए 60 दिन का वक्त है।
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वकील अनुज चौधरी ने बताया कि गांव में हुई पंचायत में आरोपी प्रदीप और सागर ने अपना अपराध कुबूल कर लिया था। बच्ची के मामा ने बताया कि वर्ष 2018 की 13 जनवरी की शाम प्रदीप और सागर ने 12 वर्ष की बच्ची को अगवा कर लिया था। बच्ची घर के बाहर कूड़ा डालने गई थी और घर पर सिर्फ उसकी मामी थी। शाम सात बजे तक भी जब बच्ची नहीं लौटी तो तलाश शुरू की गई। रात भर खोजा, लेकिन पता नहीं लगा। सुबह गांव में मंदिर के पीछे पानी से भरे गड्ढे में बच्ची का शव मिला। ग्रामीणों ने प्रदीप और सागर पर शक जाहिर किया। दोनों आपराधिक प्रवृत्ति के थे।
वारदात के वक्त दोनों की उम्र 21 वर्ष थी। गांव में दो दिन तक कई बार पंचायत भी हुई। सख्ती से पूछताछ करने पर दोनों ने अपराध कुबूल कर लिया था। जिसके बाद ग्रामीणों ने दोनों को पुलिस के सुपुर्द कर दिया था। 20 दिन बाद ही कोर्ट में चालान पेश कर दिया था।
वकील और बच्ची के मामा ने बताया कि दोषी प्रदीप और सागर ने पंचायत के दौरान ग्रामीणों के सामने और कोर्ट में शराब के नशे में वारदात हो जाने की दुहाई दी थी। उन्होंने कहा था कि वारदात की शाम को बहुत ज्यादा शराब पी ली थी। कूड़ा डालकर वापस आते वक्त बच्ची का हाथ पकड़कर खींच लिया था। उसके साथ दो-दो बार दरिंदगी की। काफी देर तक कमरे में ही रखा और उसके रोने पर पकड़े जाने का भय बना, जिस पर रात 10 बजे शॉल से गला दबाकर हत्या कर दी थी। फिर शव को गड्ढे में फेंक दिया था। उसी रात बारिश होने पर शव ऊपर आने पर हत्या का पता चला था।
बच्ची अपने मामा के साथ ही रहती थी। पिता ने उसे और उसकी मां को छोड़ दिया था, जिसके बाद मामा ने बच्ची मां की दूसरी शादी करवा दी। जिसके बाद से बच्ची मामा और मामी के साथ ही रहती थी।
भांजी के साथ दरिंदगी की गई थी। अदालत के फैसले का स्वागत है। भांजी की आत्मा को शांति मिली होगी। अदालत और वकील अनुज चौधरी का आभार हैं। वकील ने दोषियों को कड़ी सजा दिलाने के लिए बहुत मेहनत की है।
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- मामा
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