पानीपत। नगर निगम के पास शहर की संपत्तियों का कॉरपेट एरिया है जिसका निगम लोगों से टैैक्स वसूल रहा है। वहीं, प्रॉपर्टियों के कवर्ड एरिया की जांच अब तहसील को ही करनी होगी। निगम के कॉरपेट एरिया को तहसील कवर्ड एरिया मान रहा है। ऐसे में रजिस्ट्री करवाने वाले लोगों को स्टॉम्प ड्यूटी का दोगुना भुगतान करना पड़ रहा है। अब नगर निगम ने कवर्ड एरिया को तहसील के हवाले ही छोड़ दिया है। इसके बाद निगम के पास केवल अपने अधीन संपत्तियों के कारपेट एरिया की जिम्मेदारी होगी।
गौरतलब है कि नगर निगम के नए प्रॉपर्टी टैक्स सर्वे में शहर के रिहायशी व व्यावसायिक इमारतों के बिलो में प्रॉपर्टियों का कॉरपेट एरिया दर्शाया गया है। जो रजिस्ट्री वाली यूएलबी की साइट पर कवर्ड एरिया दिखाया जा रहा है। इससे परेशानी यह हो रही है कि प्रॉपर्टी का कंस्ट्रक्शन वाला कवर्ड एरिया कम होने के बाद भी इन पर स्टॉम्प ड्यूटी कॉरपेट एरिया के जितनी ही देनी पड़ रही है। निगम अधिकारियों का कहना है कि नया सर्वे में सिर्फ कॉरपेट एरिया को टैक्स वसूली के लिए दर्शाया गया है न कि रजिस्ट्री करवाने के लिए कंस्ट्रक्शन कवर्ड एरिया को दिखाया है।
सोमवार को हुई थी बैठक, अब बदलेंगे फॉर्मेट
प्रॉपर्टी टैक्स के इन मुद्दों को लेकर सोमवार को पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में शहरी विधायक, नगर निगम आयुक्त, तहसीलदार समेत टैैक्स ब्रांच के अधिकारियों की बैठक भी हुई थी। इसमें प्रॉपर्टी आईडी, एनडीसी बनवाने से लेकर कॉरपेट और कवर्ड एरिया पर भी अधिकारियों की बातचीत हुई। इसमें निगम आयुक्त ने स्पष्ट किया कि नगर निगम का काम प्रॉपर्टी टैैक्स वसूलना है। वह अपने एरिया के अधीन आने वाले प्रॉपर्टियों से उनके एरिया के हिसाब से टैक्स वसूल रहा है। जबकि संबंधित प्रॉपर्टी के कवर्ड एरिया की पैमाइश का काम तहसील का है। इसे तहसील को ही मापना चाहिए।
जल्द बदलेंगे फॉर्मेट- आयुक्त
लोगों के घर-घर जाकर असेसमेंट और बिल बंटवाए जा रहे हैं। इसके लिए दो एजेंसियों को भी लगाया है। इसका काम सुचारू रूप से जारी है। जल्द ही शहरी स्थानीय निकाय के अधिकारियों से टैैक्स, एनडीसी में आने वाली बाधाओं के बारे में बातचीत कर फॉर्मेट बदलवाया जाएगा। इससे लोगों को परेशानी न हो। -आरके सिंह, आयुक्त, नगर निगम, पानीपत।