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शहर की सफाई पर सियासत, दो गुटों में बंटे पार्षद, टकराव के बने हालात

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शहर की सफाई के लिए लगाए गए दो जोन के टेंडर पर अब फिर से सियासत शुरू हो चुकी है। हालात ये हैं कि निगम के सभी 26 पार्षद दो गुटों में बंट चुके हैं। एक गुट लगाए गए टेंडर को खुलवाने का समर्थन कर रहा है तो दूसरा गुट पहले से ही इसका विरोध कर चुका है। इस सफाई के टेंडर को लेेकर समर्थन करने वाले पक्ष ने 18 पार्षदों के हस्ताक्षर करवाने का दावा किया है, जबकि इससे पहले इसके विरोध में बैठक कर चुके पार्षदों ने 13 पार्षदों के हस्ताक्षर करवा रखे हैं।
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खास बात ये है कि इनमें से कुछ पार्षद ऐसे भी हैं जिन्होंने टेंडर खुलने के समर्थन और विरोध के प्रस्ताव पर भी हस्ताक्षर किए हैं, जब दोनों तरफ से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि उनसे गलतफहमी में हस्ताक्षर करवाए गए थे। इस टेंडर के विरोध में उतरे पार्षदों ने एक बार फिर से पालिका बाजार स्थित निगम के आयुक्त कार्यालय में बैठक तक की। जिसमें उन्होंने इस टेंडर के पक्ष में आने वाले पार्षदों को सदन की मीटिंग में इस पर विचार विमर्श करने के लिए कहा। पार्षदों के सुर स्पष्ट कर रहे थे कि अब दोनों पक्षों में इस टेंडर को लेकर टकराव होना निश्चित है।
एक पक्ष शहर की सफाई का हवाला देकर टेंडर लगवाने की कोशिश कर रहा है, जबकि दूसरा पक्ष इस टेंडर और इसकी नियम शर्तों के खिलाफ है। जनप्रतिनिधियों की इस बैठक में रविंद्र भाटिया, बलराम मकौल, विजय सहगल, अशोक छाबड़ा, दिनेश सैनी, योगेश डाबर शामिल रहे।
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हुआ यूं कि दो जोन की सफाई के टेंडरों की नियम व शर्तों के विरोध में कुछ पार्षदों ने मोर्चा खोल दिया था। इसे लेकर विधायक से भी पार्षद मिल चुके हैं, जिसके बाद 8 फरवरी को 13 पार्षदों ने इसके विरोध में प्रस्ताव लिख आयुक्त को सौंपा। उन्होंने कहा कि जब तक हाउस की बैठक में इस टेंडर पर चर्चा नहीं हो जाती तब तक इसे पेंडिंग रखा जाए। इस पर इस टेंडर को स्थगित कर दिया गया था।
अब वीरवार को दूसरे पक्ष के कई पार्षदों ने इस टेंडर को खोलने के लिए निगम आयुक्त को पत्र लिखा। उन्होंने शहर की सफाई का हवाला देते हुए इसे जल्द से जल्द खुलवाने की मांग की। टेंडर को उनके समर्थन मिलने के बाद टेंडर के विरोध में उतरे पार्षदों ने शुक्रवार को फिर से बैठक कर इसका विरोध जताया। पार्षदों ने कहा कि वे शहर को फिर से लुटने नहीं देंगे। जब तक हाउस की बैठक में इस पर चर्चा नहीं हो जाती तब तक इस न खोला जाए। इसके लिए उन्होंने दूसरे पक्ष के पार्षदों और टेंडर का समर्थन करने वाले अधिकारियों को हाउस की बैठक में खुलकर तर्क वितर्क करने का न्योता तक दिया है।
पार्षदों ने कहा कि उन्हें इस टेंडर की कोई डिटेल तक नहीं पता। कितने का टेंडर है, कितने कर्मचारी होंगे, कितनी मशीनरी होंगी ? अगर उन्हें पूरी जानकारी दी जाए तो वे इस पर विचार करेंगे। एक बार टेंडर लग गया तो अगले पांच साल के लिए हालात जेबीएम की तरह हो जाएंगे।
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