फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Panipat News: शहर की हवा खराब, 18 माह में कारणों का चलेगा पता

विज्ञापन
विज्ञापन
पानीपत। 10 माह से राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड शहर की हवा का अध्ययन करवा रहा है। ये अध्ययन 18 माह तक चलेगा। अगस्त 2024 तक पानीपत की हवा खराब होने के कारणों की रिपोर्ट सामने आएगी। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया एजेंसी से पानीपत की हवा का अध्ययन करवा रहा है। 18 माह के अध्ययन के बाद एजेंसी अपनी रिपोर्ट बोर्ड को देगी।
विज्ञापन

रिपोर्ट के आधार पर फिर बोर्ड काम करेगा। उद्यमियों की ये शिकायत भी दूर होगी कि सरकार सिर्फ उन्हें प्रदूषित हवा का दोषी मानती है। रिपोर्ट के आधार पर प्रदूषण के कारकों पर कार्रवाई की जाएगी। अध्ययन पूरी होने के बाद वायु प्रदूषण को कम करने के लिए हरियाणा सरकार रोडमैप तैयार करेगी। डाटा संग्रह, सत्यापन और व्याख्या के बाद शोधकर्ता सभी संभावित उपायों को भी बताएंगे। इन उपायों में अल्पकालिक और दीर्घकालिक दोनों को शामिल किया जाएगा। इसमें यह भी ध्यान रखा जाएगा कि कम लागत वाले अधिकतम लाभ देने वाले उपायों को लागू किया जाएगा।

2010 में आईआईटी कानपुर और 2019 में राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में इस तरह के दो अध्ययन पहले हो चुके हैं। हरियाणा में भी अध्ययन के दौरान पहली बार शहरों के पीएम 2.5 और पीएम 10 के स्रोत का अध्ययन किया जाएगा। इस अध्ययन से वाहन और गैर वाहन प्रदूषण स्रोतों की पहचान की जाएगी।
विज्ञापन

हवा के अध्ययन से वायु प्रदूषण में राज्य के उद्योग कितने जिम्मेदार हैं और कौन सा उद्योग हवा को कितना प्रदूषित कर रहा है। इसका भी पता चल सकेगा। इस जानकारी के बाद यह फायदा होगा कि हवा के प्रदूषण को कम करने के लिए किस उद्योग को कब बंद करना है यह तय हो पाएगा।


बॉक्स

पानीपत देश का 11 वां सबसे प्रदूषित शहर

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 2019 में देश के सबसे प्रदूषित शहरों की लिस्ट जारी की थी। इसमें पानीपत को देश का 11 वां सबसे प्रदूषित शहर माना गया था। प्रदेश में पानीपत गुरुग्राम के बाद दूसरा सबसे प्रदूषित शहर है। शहर की हवा खराब होने का मुख्य कारण यहां चलने वाले लगभग 20 हजार उद्योग व शहर से गुजरने वाले एक लाख वाहन हैं।


वर्जन-
रिपोर्ट के आधार पर उठाए जाएंगे सार्थक कदम
पानीपत की हवा का अध्ययन चल रहा है। एक फरवरी से हवा का अध्ययन शुरू कराया गया था। 10 माह बीत चुके हैं। आठ माह बाद एजेंसी अपनी रिपोर्ट देगी। इस रिपोर्ट के आधार पर सार्थक कदम उठाए जाएंगे।
विज्ञापन

- पी. राघवेंद्र राव, चेयरमैन प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें