पानीपत। स्कूल संचालकों की मनमानी की वजह से बच्चों को खुद के वजन के मुकाबले 10 के बजाय 20 प्रतिशत तक बस्ते का वजन उठाना पड़ रहा है। इसका खुलासा सीडब्ल्यूसी की तरफ से चलाए गए एक अभियान में हुआ है। इसके तहत सीडब्ल्यूसी ने सोमवार को छह स्कूलों में जाकर बच्चों और उनके बस्तों के वजन की नापतोल किया। इसमें 95 प्रतिशत बच्चों के वजन से बस्तों के वजन ज्यादा मिले।
सीडब्ल्यूसी सदस्य डॉ. मुकेश आर्य ने बताया कि वर्तमान समय में देखने को मिल रहा था कि बच्चों को बस्ते का वजन ज्यादा उठाना पड़ रहा है जबकि नियम है कि बच्चों को खुद के वजन के 10 प्रतिशत तक ही बस्ते का बोझ उठाना चाहिए। इसके बाद उन्होंने नवीनतम स्कूल बैग पॉलिसी लागू करने और सभी स्कूलों में जांच कराने के लिए 12 अप्रैल 2022 को जिला शिक्षा अधिकारी को पत्र लिखा था लेकिन कोई जवाब न मिलने पर उन्होंने 18 अप्रैल को रिमाइंडर भेजा तो जवाब मिल गया। शिक्षा अधिकारी ने खंड शिक्षा अधिकारियों को जांच कराने के निर्देश दिए लेकिन वह संतुष्ट नहीं हुए।
डॉ. मुकेश आर्य ने बताया कि उन्होंने खुद ही स्कूलों में जाकर जांच का फैसला किया। सोमवार को नापतौल विभाग के इंस्पेक्टर मुकेश कुमार से संपर्क कर उन्होंने वजन करने वाली दो मशीनें ली। जिला शिक्षा अधिकारी की ओर से उन्हें दो सहायक वीरेंद्र और हितेंद्र उपलब्ध कराए गए। चाइल्ड हेल्पलाइन की ओर से कोऑर्डिनेटर पूजा मलिक और अंकित को टीम में शामिल किया। सुबह छह से लेकर दोपहर 12 बजे तक छह सीबीएसई स्कूलों में 50 से 60 बच्चों की रिपोर्ट तैयार की, जिसमें 95 प्रतिशत बच्चों के बस्ते का बोझ ज्यादा मिला।