अंबाला। बाढ़ जैसे हालात बनने पर कैंट के उद्योगों को अभी तक सरकार की तरफ से किसी भी प्रकार की मदद नहीं मिली है। यहां तक कि उद्योग संचालकों की मांग थी कि बिजली की दरों में उन्हें रियायत दी जाए इस पर भी मंथन नहीं किया गया। उद्योगों के नुकसान को दो से तीन महीने का समय हो चुका है मगर अभी तक उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। यहां तक कि दो बार तो हरियाणा चैम्बर ऑफ कॉमर्स की अंबाला शाखा के पदाधिकारी सीएम नायब सिंह सैनी को मिलकर उद्योग संचालकों की तरफ से मांगें रख चुके हैं मगर इस पर भी कोई प्रगति दिखाई नहीं दे रही है। बहरहाल लंबे इंंतजार के बाद अब कारोबारियों ने अपनी फैक्टरियों को दोबारा से पटरी पर लाना शुरू कर दिया है। पर उन्हें बारिश के पानी से हुए जलभराव से नुकसान पहुंचाया ऊपर से एक डेढ़ महीने तक उनकी फैक्टरियां बंद रहीं इस दौरान के बिजली के शुल्क भी उन्हें चुकाने पड़ गए।
पिछली बार बाढ़ में हुए नुकसान पर ही नहीं मिली थी राहत
वर्ष 2023 में टांगरी नदी का पानी कैंट के इंडस्ट्रियल एरिया में घुस गया था। उस समय कारोबारियों का 500 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था। कुछ कारोबारियों ने तो बीमा के माध्यम से अपने नुकसान की कुछ भरपाई कर ली मगर कुछ को कर्ज लेकर करोड़ों रुपये की मशीनें दोबारा लगानी पड़ गईं थीं। ऐसे में उस समय सरकार ने उद्योग संचालकों से फार्म भरवाए ताकि नुकसान की भरपाई हो सके, मगर उद्योग संचालकों को कोई मुआवजा या राहत नहीं मिली। इस बार तो फार्म भी नहीं भरवाए गए हैं। जबकि पिछली बार से दोगुना नुकसान इस बार हुआ है। यहां तक कि यह आकलन भी नहीं किया गया कि उद्योग संचालकों को कितना नुकसान हुआ है।
बीमा में भी नहीं मिली पूरी राशि
जिन उद्योग संचालकों ने अपनी फैक्टरी और सामान का बीमा कराया हुआ था उन्हें भी अभी तक समाधान नहीं मिल सकता है। बीमा कंपनियां भी कटौती के बाद ही भुगतान करेंगे। जिन्हें भुगतान मिल गया है उन्हें 40 से 55 प्रतिशत तक ही बीमा कंपनियों ने भुगतान दिया है। वहीं जिन उद्योगपतियों ने बीमा नहीं कराया था अब कोई कंपनी उनका बीमा कर भी नहीं रही है। ऐसे में उद्योग संचालक अभी भी समस्याओं में फंसे हुए हैं। अंबाला साइंटिफिक इंस्ट्रूमेंट मैन्युफेक्चरर्स एसोसिएशन के महासचिव उमाकांत ने बताया कि अंबाला कैंट में फैक्टरियों में काम पटरी पर लौट रहा है। अभी तक कोई विशेष राहत नहीं मिली है।