माई सिटी रिपोर्टर
पानीपत। पंडित राधे-राधे महाराज ने कहा कि कर्म का बोध केवल सत्संग ही करा सकता है। ऐसा शास्त्रों में कहा गया है। कर्म के बिना मनुष्य विचाराधीन रहता है। केवल विचार की दुनिया के अंदर भूला भटका इधर उधर का चिंतन करता हुआ अपने आप को खो देता है।
वृंदा एंक्लेव परिवार की ओर से सेक्टर-13/17 पार्क नंबर-3 में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के तीसरे दिन बुधवार को उन्होंने कहा कि कर्म के बिना धर्म की कल्पना करना निरर्थक है क्योंकि कर्म ही धर्म की प्रथम सीढ़ी है। धर्म करने के लिए भी पहले हमें कर्म करना पड़ेगा। भगवत गीता के अंदर योगीराज भगवान कृष्ण ने अर्जुन को कुरुक्षेत्र के पावन पवित्र स्थल पर केवल कर्म का बोध कराया। भगवान श्रीकृष्ण ने गीता के अंदर कर्म को इतनी प्रधानता दी, जैसे मानव धर्म उसके सामने बौना हो गया हो।
धर्म कर्म मनुष्य जीवन के दो पहलू हैं, यदि हम अपने संपूर्ण मानव जीवन यथार्थ में जीना चाहते हैं या फिर सत्य में जीना चाहते हैं यह जीवन के मूल्य को हम समझना चाहते हैं तो हमें कर्म के साथ धर्म का ज्ञान लेना परम आवश्यक है। ज्ञान कोई वस्तु नहीं है। जिसे खरीदा या फिर बेचा जा सके। यह स्वयं के अध्ययन और कर्म पर निर्भर करता है। इस अवसर पर अजय बंसल, जोगिंद्र भट्ट, कृष्ण मनचंदा, कृष्ण बधवा, बीडी बधवा, नवीन जिंदल, मनोहर लाल शर्मा, महेंद्र कंसल, तिलकराज मिगलानी, सतीश गंभीर, दिलीप गुप्ता,नरेश सहगल व सतप्रकाश गिरधर मौजूद रहे।
श्रीमद्भावत कथा करते राधे-राधे महाराज। स्रोत : स्वयं